विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र बंधन है। हमारे समाज में यह चिंता का विषय बनता जा रहा है कि योग्य युवक-युवतियों के विवाह समय पर नहीं हो पा रहे हैं। बढ़ती आयु के कारण कई परिवार मानसिक तनाव, सामाजिक चिंता और आर्थिक बोझ का सामना कर रहे हैं। विवाह में देरी के अनेक कारण हो सकते हैं—अत्यधिक ऊँची अपेक्षाएँ, छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते अस्वीकार कर देना, दहेज जैसी अनुचित सोच, शिक्षा या नौकरी को लेकर कठोर शर्तें, सीमित सामाजिक संपर्क तथा आपसी संवाद की कमी। कई बार परिवार केवल ‘सबसे अच्छा रिश्ता’ खोजते-खोजते उपयुक्त रिश्ते भी खो देते हैं। समय पर विवाह होने से परिवारों में स्थिरता आती है, समाज में सद्भाव बढ़ता है और नई पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित होता है। इसलिए हमें अपनी सोच में संतुलन लाने की आवश्यकता है। रिश्ते तय करते समय सबसे अधिक महत्व अच्छे संस्कार, चरित्र, आपसी सम्मान, स्वास्थ्य और पारिवारिक मूल्यों को देना चाहिए। समाज के सभी वरिष्ठजन, युवा और अभिभावक मिलकर विवाह योग्य युवक-युवतियों का परिचय सम्मेलन आयोजित करें, आपसी संवाद बढ़ाएँ और बिना किसी भेदभाव के योग्य रिश्तों को प्रोत्साहित करें। दहेज, दिखावा और अनावश्यक शर्तों से दूर रहकर सरल एवं सादगीपूर्ण विवाह की परंपरा को बढ़ावा दें। आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि अपने समाज के प्रत्येक योग्य युवक-युवती का विवाह उचित समय पर कराने में सहयोग करेंगे। यही हमारे समाज की एकता, प्रगति और उज्ज्वल भविष्य की सच्ची पहचान होगी।
-रतनपाल सिंह, बुलंदशहर
मो. 9634626627
अपने समाज में विवाह में हो रही देरी-एक चिंतन!
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