यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। समाज में दिखावे और झूठी शान (शर्म) के कारण गरीब और मजदूर परिवार अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट स्कूलों में भेज रहे हैं, जिससे उनका बजट बिगड़ जाता है और वे आगे चलकर उच्च शिक्षा या सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए पैसे नहीं बचा पाते। उत्तर प्रदेश सरकार प्राथमिक विद्यालयों में मुफ्त या बहुत कम दाम में किताबें, कॉपियां, ड्रेस और बेहतरीन शिक्षा दे रही है। उत्तर प्रदेश सरकार को कक्षा 1 से 5 तक के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले समस्त बच्चों को टेबल और चेयर भी उपलब्ध करानी चाहिए जिससे उनका मनोबल बढ़ेगा। उनको भी लगेगा की हमें प्राइवेट स्कूल की तरह बैठने में कोई परेशानी नहीं है। इससे उनका मनोबल बढ़ेगा। मध्यम और गरीब परिवारों को इस सरकारी व्यवस्था का लाभ उठाना चाहिए ताकि वे भविष्य के लिए अपनी पूंजी बचा सकें। प्राइवेट स्कूल की महंगी फीस के चक्कर में अपनी गाढ़ी कमाई बर्बाद न करें। सरकारी स्कूलों में मुफ्त किताबें, ड्रेस और मिड-डे मील जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जिससे आपकी बचत होती है। आज बचाए गए पैसे कल आपके बच्चे को सरकारी नौकरी की तैयारी कराने में काम आएंगे। आज उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। समस्त जिलों के जिला अधिकारी व संबंधित विभाग इन स्कूलों की व्यवस्था पर ध्यान दें। कई स्कूलों में टूटी दीवारें, बिजली की कमी और साफ शौचालय न होना, शिक्षकों की कमी आदि समस्याएं हैं। कई जगहों पर एक ही शिक्षक पूरी पाठशाला संभालता है। शिक्षकों का मिड-डे मील और प्रशासनिक कामों में व्यस्त रहना, शिक्षकों की समय पर उपस्थिति और पढ़ाई के स्तर की जांच न होना सबसे बड़ा सवाल है जिसके बारे में उत्तर प्रदेश सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिएं।
–शरद पाल, प्रदेश संगठन मंत्री,
आल इंडिया धनगर समाज महासभा
मो. 9897332582
प्राइवेट स्कूलों के चक्कर में अपनी गाढ़ी कमाई बर्बाद न करें!
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