हमारे समय की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि लोग उन लड़ाइयों में मर रहे हैं जिनका कोई इतिहास भी नहीं बनेगा। कहीं किसी ने हॉर्न बजा दिया…कहीं किसी ने ओवरटेक कर लिया…कहीं किसी ने गाली दे दी…कहीं किसी ने सोशल मीडिया पर अपमानित कर दिया…कुछ सेकंड के भीतर आदमी यह मान बैठता है कि अब यदि जवाब नहीं दिया तो उसकी वीरता, उसकी प्रतिष्ठा और उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। फिर सड़कें अखाड़ा बन जाती हैं और घर लौटने वाला आदमी कभी-कभी घर लौट ही नहीं पाता। क्रोध पहले विवेक छीनता है, फिर स्मृति, फिर बुद्धि और अंत में मनुष्य स्वयं नष्ट हो जाता है। जरा सोचिए, जिस आदमी ने आपको गाली दी, क्या वह आपके जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है? क्या वह पाँच मिनट बाद आपको याद भी रखेगा? शायद नहीं। लेकिन यदि आपने उसी क्षण प्रतिक्रिया दे दी, तो वही पाँच मिनट आपकी पूरी जिÞंदगी की दिशा बदल सकते हैं। हमारे समय की सबसे बड़ी समस्या अहंकार का बाजार है। हर जगह यह बेचा जा रहा है कि अगर चुप रहे तो लोग तुम्हें कमजोर समझेंगे। यही सोच लोगों को उकसाती है कि हर चुनौती स्वीकार करो, हर अपमान का बदला लो, हर विवाद में आखिरी शब्द तुम्हारा होना चाहिए। लेकिन सभ्यता का निर्माण उन लोगों ने नहीं किया जो हर गाली का जवाब देते थे। सभ्यता उन लोगों ने बनाई जिन्होंने अपनी ऊर्जा को सड़क के झगड़ों, व्यक्तिगत अपमानों और क्षणिक उत्तेजनाओं में बर्बाद नहीं किया। जिन्होंने समझा कि मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत उसका बाहुबल नहीं, विवेक है। समाज का हर विवाद आपका निजी युद्ध नहीं होता। कई बार लोग आपको अपनी लड़ाई में मोहरा बनाना चाहते हैं, वे भावनाएँ भड़काते हैं, अहंकार को ललकारते हैं और आपको ऐसी जगह खड़ा कर देते हैं जहाँ नुकसान आपका होता है, लाभ किसी और का। समझदारी यह है कि पहले यह देखा जाए कि संघर्ष किसके हित में है, उसका परिणाम क्या होगा और उसमें आपकी भूमिका वास्तव में आवश्यक भी है या नहीं। सत्ता, बाजार और सामाजिक समूह अक्सर लोगों को भावनात्मक नारों के सहारे ऐसे संघर्षों में धकेल देते हैं जिनसे आम लोगों का जीवन और कठिन हो जाता है, जबकि लाभ किसी और को मिलता है। ऐसे समय हर उकसावे पर प्रतिक्रिया देना विवेक नहीं है। वास्तविक समझ यह है कि अपनी ऊर्जा को उन संघर्षों के लिए बचाया जाए जो शोषण, अन्याय और असमानता को वास्तव में कम कर सकें। जो व्यक्ति अपनी शक्ति का उपयोग चुनकर करता है, वही बड़े बदलावों में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
-रामकृष्ण बघेल, ग्वालियर
मो. 7879705286
हर उकसावे पर प्रतिक्रिया देना विवेक नहीं है!
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