दिल्ली ने मेरे को ही नहीं, शायद सभी को अपनी घटी राम कहानी से, अपनी तरफ हो रही घटनाओं के लिए आकर्षित किया है। दिल्ली भारतीय शासन व्यवस्था में सदियों से चर्चा में रही है। यहाँ से देश में सदैव नया होने, करने और घटने की उम्मीदें इस देश के नागरिकों को रही हैं। इसलिए एक युवा अभिजीत दीपके ने भी नया करने के लिए दिल्ली को चुना। मैं यहाँ लिख रहा हूँ, इससे आगे दिल्ली में फिर कुछ नया होगा क्योंकि तीन हठ-बालहठ, त्रिया (स्त्री) हठ और राजहठ स्थायी माने गए हैं। महाभारत के लिए और राम की कहानी के लिए ऊपर कहे तीन हठों के कारणों को कोई कैसे नकार सकता है? इन्हीं तीन कारणों से सब घटता और होता आया है। व्यवस्था बदलने में भी उक्त तीन कारणों को बुद्धिजीवी तरजीह देते आये हैं। यहाँ राजहठ एक बार फिर प्रयोग में आया है। आप सब बदलाव के लिए आगे आएं, शायद यही समय की मांग है क्योंकि कितना भी वैचारिक संतुलन सत्ता वाले कर लें, लेकिन नए को करने वाले इस हठ में जरूर जीतेंगे क्योंकि सर्वथा पोल सबकी खुलती है। यह राजनैतिक चमत्कार सत्तावानों ने सदैव किये हैं क्योंकि काजी और पाजी में फासला कम होता है। वही खेल दिल्ली में चल रहा है; वहाँ से व्यवस्था परिवर्तन होना निश्चित हो चला है, शायद इसे रोकना अब असम्भव है।
-जगदीश प्रसाद पाल, उन्नाव
परास्नातक जनसंचार
मो. 9794866822
व्यवस्था परिवर्तन होना निश्चित हो चला है!
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