प्राचीन काल से शिक्षा का बड़ा महत्व रहा है। ऋषि-मुनियों, संस्कृत विद्यालयों, गुरुकुल आदि संस्थाओं के द्वारा सभी शिक्षा को सच्चे मन से ग्रहण करते थे। शिक्षा लेते समय नकल का सहारा बिल्कुल नहीं होता था। चाहे शिक्षा सरकारी विद्यालय से ली गयी हो, चाहे गुरुकुल से ली गयी हो किंतु शिक्षा नकलविहीन होती थी। शिक्षा आपकी क्षमता पर निर्भर करती है कि आप किस क्षेत्र की शिक्षा लेने जा रहे हैं। आप उस क्षेत्र के नायक बनोगे। ध्यान रखना, उसी से आपको जिंदगी में सम्मान मिलेगा। नकल का सहारा लिया तो निश्चित तौर पर आपको अपमान मिलेगा। पेपर लीक मामले में अभी हाल में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सामने आया। जिन छात्रों ने नकल से नौकरी ली, अब उनकी धड़कन बढ़ रही होंगी कि कहीं मेरी जांच न हो जाये, नौकरी भी जाएगी और दस-बीस लाख रुपये भी जा सकते है, जेल भी हो सकती है। नौकरी बिना मेहनत मिली है तो काम नहीं आएगी। फाइल, रिपोर्ट, जनता की समस्याएं जा फसेंगी। तब या तो रिश्वत दो या जूनियर से कराएंगे या ट्रांसफर मांगेंगे, प्रमोशन में अड़चनें पैदा होंगी, बर्खास्तगी का डर रहेगा। एक नकलची डॉक्टर, मास्टर, पुलिस वाला ही लोगों की जिंदगी खराब करता है। अत: हरिकमल दर्पण के पाठकों से यही विनती है कि नकल रूपी शिक्षा विष का प्याला है। शिक्षा का अमृत रूपी प्याला अपने बच्चे को पिलाने की कृपा करें। समाज में नाम ऊंचा करें।
-धनगर गंगा विष्णु चन्देल
तहसीलदार, दिल्ली सरकार
मो. 9899641263
शिक्षा अमृत है-सच्चे मन से पियो!
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