Harikamaldarpan

लोड हो रहा है... लोड हो रहा है...

समाज की महिलाओं को भी लड़ना सीखना पड़ेगा!

मैंने बरसों से तमाम बिरादरी के संगठनों में महिलाओं के शामिल होने की बात की है, लेकिन पुरुष प्रधान मानसिकता के लोगों ने मेरी इस बात पर कभी ध्यान नहीं दिया। मैंने कई सभाओं में बनीं कार्यकारिणियों को इसलिए नकारा कि इस कार्यकारिणी में महिलाएं नहीं हैं। मेरा इस बात पर विरोध है कि किसी अन्य समाज से ज्यादा पाल, बघेल, गड़रिया समाज की महिलाओं की वजह से लड़ाई, झगड़े होते ही रहते हैं। अभी हाल ही में खबर मिली की एक महिला जहर खाकर मरी। इसकी वजह पता नहीं चल पायी, हालांकि दिवंगत महिला मेरे ही परिवार की थी। मुझे कोई भनक तक नहीं थी। इस दम्पति को मैंने अभी हाल ही में अपने लड़के के विवाह में बुलाया था, लेकिन उनमें आपस में क्या चल रहा था, इसका मुझे पता नहीं चला। यदि महिला मुझे बताती तो सम्भवत: इस प्रकार की घटना को रोका जा सकता था। समाज में बढ़ रहा यह ट्रेंड कि कोई किसी से बात बताता नहीं है, यह पिछड़े समाजों की बड़ी समस्याओं मे से एक सबसे बड़ी समस्या है। मैंने यहाँ तक कि महिला आरक्षण जो पार्लियामेंट में होना है, की बहस जो भविष्य में होनी है इस पर ओबीसी आरक्षण के दोगुना होने के उपरांत महिला आरक्षण पर अपनी बात तमाम मंचों पर रखी है। समाज के लोगों से अपील है कि आप सब लोग महिलाओं को भी मीटिंग मे लायें। उनको भी लड़ना सीखना पड़ेगा, चाहे घर हो या बाहर, न कि अपना जीवन दे करके। यह क्या सिखाना है? कम से कम मैं इसे सिरे से खारिज करता हूँ। इसे सभी समझें और सराहें।
-जगदीश प्रसाद पाल, उन्नाव
परास्नातक जनसंचार
मो. 9794866822

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

संबंधित खबरें

Scroll to Top
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x