भूल गए तहजीब हिन्द की
क्यों शील सभ्यता भूल गये?
भूल गए परिपाटी अपनी
क्या शिष्ट संयमिता भूल गये?
जिन अधरों पर भारत माँ के
गौरव का जयघोष नहीं।
भाषा भूल रही मर्यादा
रहा तनिक भी होश नहीं।
देश विरोधी बड़ी ताकतें
सत्ता के सौदागर आये।
सियासी रोटियां लगे सेंकने
कुछ स्वांगी बाजीगर आये।
नहीं पीर से सरोकार था
केवल वोटों के व्यापारी।
मन पीड़ा है बड़ी चुभन है।
भोली जनता हुई आभारी।
जिस धरनी की धूल है चंदन
जल है गंगाजल पावन।
जिसकी गोद सजी वीरों से
उसको कहे अशुद्ध वचन।
जिस थाली में खाया हमने
उसी थाल में छेद किया।
जिस माटी से पाया जीवन
सीना उसका भेद दिया।
सत्ता से संघर्ष उचित है
अन्यायों पर प्रहार करो।
भारत माँ की अस्मिता से
नहीं घृणित व्यवहार करो।
गाली से परिवर्तन होते गर
इतिहास बदल जाता।
शीश नहीं बलिवेदी चढ़ते
मुक्त हिन्द ना हो पाता।
राष्ट्र भाव प्रबलता में हो
और सद्भावना साथ रहे।
दोष रहित कर्तव्य पथ हो
तभी तिरंगा हाथ रहे।
आहत मन से चली लेखनी
पक्ष-विपक्ष की बात नहीं।
राष्ट्र भाव है प्रथम कर्तव्य।
सचिन पाल की सौगात यही।
प्रस्तुति : श्याम शंकर पाल उर्फ सचिन
हरिकमल दर्पण हरियाणा प्रभारी, पाल एकता मंच राष्ट्रीय सचिव,
भारतीय जीवन बीमा निगम, सीनियर इंश्योरेंस एडवाइजर
मो. 9891441417, 9999007349
वंदेमातरम…
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