15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और 79 वर्ष पूर्ण हो गए, 80वां स्वतंत्रता दिवस राष्ट्र मनाने जा रहा है। आज यह चिंतन का विषय है कि राष्ट्रवासियों ने क्या खोया क्या पाया? क्या हम वास्तव में स्वतंत्र हो गए अथवा नहीं, इस पर भी गंभीरतापूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि स्वतंत्रता की परिभाषा क्या है। स्व का अर्थ होता है स्वयं का और तंत्र का अर्थ होता है वह माध्यम जिसके द्वारा हम काम करते हैं। अत: सामान्य रूप से यह समझें कि स्वतंत्रता का मूल अर्थ स्वयं के तंत्र को विकसित करना, अपने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए स्वतंत्रतापूर्वक विचार करना, योजना बनाना, कानून बनाना, आवश्यकता पड़ने पर संविधान में संशोधन करना, अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए रणनीति बनाना, राष्ट्र की प्रजा के सर्वांगीण विकास हेतु योजना बनाना, उनको धार्मिक-आर्थिक-सामाजिक-शिक्षा-स्वास्थ्य-रोजगार के क्षेत्र में उन्नत बनाना, सक्षम बनाना है। अब हम चर्चा करेंगे कि क्या हम उपरोक्त विषयों पर स्वतंत्र हो चुके हैं या आज भी हम परतंत्र हैं। अंग्रेजों ने भारतीय लोगों को प्रताड़ित करने के लिए नए-नए कानून बनाए। भारत में सर्वप्रथम कोलकाता में शराब बिक्री के लिए उन्होंने कानून बनाए और एक लाइसेंस जारी किया, बाद में वे पूरे देश में व्यापार करने लगे। अंग्रेजों ने मोटर व्हीकल एक्ट बनाया जिसमें यदि अंग्रेज अधिकारियों के हाथ से दुर्घटना हो जाए, किसी की मृत्यु हो जाए तो उस पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती थी लेकिन यदि किसी भारतीय के हाथों हो जाए तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाती थी। वह मोटर व्हीकल एक्ट आज भी हमारे ऊपर लागू है। अंग्रेज तो चले गए लेकिन हमारी सरकार ने आज तक इस कानून में परिवर्तन नहीं किया। अंग्रेजों ने लूटने के लिए कानून बनाया था, जो ज्यादा लूटता था उसे सर की उपाधि दी जाती थी। लोग आज भी एक-दूसरे को सम्मान सहित सर और मैडम कहते हुए गर्व करते हैं। लेकिन यह हमारी संस्कृति नहीं है, उन्हें यह भी नहीं मालूम कि सर का मतलब क्या होता है। देश को लूटने का कानून भ्रष्टाचार के माध्यम से आज भी कायम है। आज नेताओं के ऊपर लूट, भ्रष्टाचार व अन्य अपराधों के भारी संख्या में मामले दर्ज हैं। अंग्रेजों की तर्ज पर आज भी मंदिरों से सोना और चांदी बड़ी मात्रा में लूटा जा रहा है। वर्तमान में उन्हें बाहुबली कहा जाता है। गंभीर अपराधों में उन्हें जमानत मिल जाती है। एक से अधिक जगह से चुनाव लड़ते हैं और जीत जाते हैं। अपराधियों का झुंड संसद में पहुंच चुका है। जब युवा शिक्षा और नौकरी के अपने अधिकार के लिए आवाज उठाते हैं तो उन पर काले अंग्रेजों के द्वारा बर्बरता से लाठियां बरसाई जाती हैं। अनेक छात्रों की मृत्यु हो जाती है जबकि अनेक छात्र पेपर लीक होने के कारण आत्महत्या कर लेते हैं, उनके माता-पिता व परिवार के लोग बर्बाद हो जाते हैं। गांव का गरीब किसान आज खाद के लिए, दवा के लिए आंदोलन करता है, अपनी फसल की बिक्री के लिए मांग करता है, लेकिन इसके लिए कोई चर्चा नहीं होती बल्कि उनके आंदोलनों को बलपूर्वक दबाया जाता है। कहा तो जाता है कि जय जवान-जय किसान, लेकिन प्रयोग में यह उलट है। गाय कट रही है भारत जैसे राष्ट्र में जहां विश्वगुरु बनने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। पशु-पक्षियों की हत्या हो रही है, जंगल काटे जा रहे हैं, आधुनिकता के नाम पर महिलाओं को नंगा किया जा रहा है, टीवी पर फिल्मों में उनका प्रदर्शन कराया जा रहा है। यह संस्कृति भारत की नहीं है, यह संस्कृति अंग्रेजों की दी हुई एक गाली है जिसे आज तक हमारे देश की सरकार ने नहीं बदला बल्कि उसमें और संशोधन कर इजाफा किया। आज घर-घर में नशे की सामग्री पहुंचाई जा रही है, गौमांस बेचा जा रहा है, अनुसूचित जाति-जनजाति-पिछड़ा वर्ग के लोगों के साथ बर्बरतापूर्वक अत्याचार हो रहा है। उनकी बहू-बेटियों के साथ बलात्कार हो रहा है और सरकार चुपचाप बैठी हुई है। भारत में अंग्रेजों के वायसराय, मुगलों के नाम पर अनेक रोड, स्मारक हैं जबकि स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले साहित्यकारों, प्रबुद्ध नागरिकों के परिवार आज मजदूरी करने को विवश हैं, कोई उनका नाम लेने वाला नहीं है। ऐसे में विचार कीजिए कि क्या हम स्वतंत्र हैं? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होने के बाद भी हम अपने विचार सम्मानजनक ढंग से नहीं रख पाते, हमारी बातों को कोई सुनता नहीं। देश के नौनिहालों को नशे की गर्त में डुबाया जा रहा है और हम उन्हें मरते हुए देख रहे हैं। विदेशी कंपनियां व्यापार के नाम पर आज देश को लूट रही हैं। हम स्वतंत्र नहीं हुए हैं, यह स्वतंत्रता आधी अधूरी है। देश कहने को स्वतंत्र है लेकिन आज पहले से ज्यादा गुलाम है। इस गुलामी से बाहर आने के लिए प्रयत्न करना ही पड़ेगा।
-नारायण प्रसाद पाली
वरिष्ठ नागरिक साहित्यकार गडरिया समाज छत्तीसगढ़
मो. 9575761235
अभी भी आधी-अधूरी है हमारी स्वतंत्रता!
0
0
votes
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted