जीवन में हमारी दो सम्पत्तियां होती हैं-पहली चल सम्पत्ति जो मुख्यत: चलती-फिरती रहती है जैसे नगद, सोना, गाड़ी, बैंक बैलेंस, शेयर जिसे व्यक्ति एक जगह से दूसरी जगह ले जाता है। दूसरी सम्पत्ति अचल होती है। जिसे एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जा पाता जैसे खेत, मकान, दुकान, जमीन। पैतृक सम्पत्ति आपको दादा, परदादा या उससे ऊपर की 4 पीढ़ियों से विरासत से मिली है। इसमें पिता की कमाई से मिली सम्पत्ति नहीं है जबकि पिता की खुद की कमाई वाली सम्पत्ति को स्व अर्जित सम्पत्ति कहते हैं। उसे वह चाहे किसी को भी दे सकता है। हिन्दू उतराधिकार अधिनियम 1956 के नियम से पैतृक संपत्ति पर बेटे, पोते, परपोते का जन्म से ही अधिकार होता है। अचल संपत्ति का किसी भी तरह से हस्तान्तरण न होने दें क्योंकि यही सम्पत्ति बुरे समय में साथ देती है, जैसे कोरोना काल में पब्लिक शहर छोड़कर जब गांव भागी थी तो अचल संपत्ति ने ही जीवन बचाया था।
-धनगर गंगा विष्णु चन्देल
तहसीलदार, दिल्ली सरकार
मो. 9899641263
पैतृक सम्पत्ति जीवन के कठिन समय में साथ देती है!
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