मथुरा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर श्रीकृष्ण और राधा रानी के दर्शनार्थ जाते समय दिल्ली सरकार के तहसीलदार धनगर गंगाविष्णु चन्देल की मुलाकात गांव पलसो, बरसाना, जिला मथुरा निवासी भेड़पालक मोहन सिंह धनगर से हुई। बातचीत के दौरान तहसीलदार ने चरवाहे से पूछा कि आप यह कार्य क्यों कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में हमने 25 भेड़ें 13,000 रुपये प्रति भेड़ के हिसाब से खरीदकर यह व्यवसाय शुरू किया है। अभी हाल में एक लाख रुपये में ये बड़े-बड़े मेढ़े (नर) की बिक्री भी कर चुके हैं। उनके पूर्वज भी पहले भेड़ पालते थे। घर में सरकारी राशन कोटे की दुकान भी है और लड़के नौकरी करते हैं। इस व्यवसाय से उनके घर की आर्थिक स्थिति विकास की ओर जा रही है। मोहन सिंह का आर्थिक विकास भेड़पालन से ही हुआ है। भेड़पालन से गरीब और ग्रामीण परिवारों की आजीविका चलती है। इसका पर्यावरणीय लाभ भी है और धार्मिक महत्व भी है। इसीलिए भेड़ गरीब की गाय है। -ब्यूरो
भेड़ गरीब की गाय है-धनगर गंगाविष्णु चन्देल
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