‘जिस ओर युवा शक्ति चलती है, उस ओर जमाना चलता है।’ युवा किसी भी राष्ट्र और समाज की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। जिस समाज के युवा जागरूक, शिक्षित, संस्कारवान, आत्मविश्वासी और अपने इतिहास से परिचित होते हैं, उस समाज को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। युवा केवल किसी देश का भविष्य नहीं होते, बल्कि वे उसके वर्तमान को दिशा देने की क्षमता भी रखते हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि हमारे युवा केवल दूसरों के बनाए हुए रास्तों पर चलने के बजाय अपने इतिहास को जानें, अपने महापुरुषों और वीर-वीरांगनाओं के जीवन से प्रेरणा लें और परिस्थितियों के अनुसार अपना रास्ता स्वयं बनाने का प्रयास करें। हमारे इतिहास में ऐसे अनेक महान व्यक्तित्व हुए हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने साहस, संगठन, दूरदृष्टि, नेतृत्व और कर्मठता से इतिहास की दिशा बदल दी। ऐसे महापुरुषों को केवल जयंती और पुण्यतिथि तक सीमित रखना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि नहीं है। सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी जब हम उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दें।
सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य से लें संगठन और नेतृत्व की प्रेरणा : सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य का जीवन युवाओं को बताता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति, सही मार्गदर्शन, रणनीति और संगठन की शक्ति से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने एक मजबूत साम्राज्य की नींव रखी। उनके जीवन से युवाओं को यह सीख मिलती है कि केवल व्यक्तिगत सफलता पर्याप्त नहीं है। यदि प्रतिभा, शक्ति और योग्यता को सही दिशा में लगाकर समाज और राष्ट्र के लिए उपयोग किया जाए, तो उसका प्रभाव बहुत व्यापक होता है। आज के युवाओं को चंद्रगुप्त मौर्य से नेतृत्व, अनुशासन, संगठन और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा लेनी चाहिए।
सम्राट अशोक से लें परिवर्तन और लोककल्याण की प्रेरणा : सम्राट अशोक भारतीय इतिहास के उन महान शासकों में हैं जिनके जीवन में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखाई देता है। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि शक्ति का सर्वोच्च उद्देश्य केवल विजय प्राप्त करना नहीं, बल्कि मानव कल्याण और समाज के हित में उसका उपयोग करना भी है। आज के युवाओं के लिए अशोक का जीवन यह संदेश देता है कि मनुष्य अपने विचारों और कर्मों में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। यदि हमारे भीतर जागृति आती है तो हम अपनी ऊर्जा को विनाश के बजाय निर्माण, सेवा, सद्भाव और लोककल्याण की दिशा में लगा सकते हैं। युवा शक्ति जब सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ती है, तभी वह समाज के लिए वास्तविक परिवर्तनकारी शक्ति बनती है।
सूबेदार मल्हार राव होलकर से लें संघर्ष और दूरदृष्टि की प्रेरणा : होलकर साम्राज्य के संस्थापक सूबेदार मल्हार राव होलकर का जीवन संघर्ष, साहस, सैन्य नेतृत्व और दूरदृष्टि की प्रेरणा देता है। सामान्य परिस्थितियों में आगे बढ़ना आसान होता है, लेकिन कठिन परिस्थितियों में अपने लक्ष्य पर टिके रहना ही असली नेतृत्व है। मल्हार राव होलकर ने अपने पराक्रम और नेतृत्व से अपनी पहचान बनाई और एक सशक्त राज्य की नींव रखी। युवाओं को उनके जीवन से यह सीख लेनी चाहिए कि अवसर का इंतजार करने के बजाय अपनी योग्यता, मेहनत और साहस से अवसर पैदा करने का प्रयास करना चाहिए।
वीरांगना भीमाबाई होलकर से लें साहस और स्वाभिमान की प्रेरणा : हमारे इतिहास में वीरांगनाओं का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वीरांगना भीमाबाई होलकर का नाम साहस, स्वाभिमान और संघर्ष की प्रेरणा देता है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि नारी शक्ति किसी भी चुनौती के सामने कमजोर नहीं है। जब उद्देश्य स्पष्ट हो, मन में साहस हो और आत्मसम्मान जीवित हो, तब कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है। आज हमारी बेटियों और युवतियों को भी अपने इतिहास की ऐसी वीरांगनाओं के जीवन को जानने और उनसे प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। समाज की प्रगति तभी पूर्ण होगी जब युवा शक्ति के साथ नारी शक्ति भी जागरूक और सशक्त होगी।
सम्राट यशवंत राव होलकर से लें आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच की प्रेरणा : सम्राट यशवंत राव होलकर, जिन्हें उनके असाधारण सैन्य कौशल के कारण ‘भारतीय नेपोलियन’ के नाम से भी जाना जाता है, युवाओं के लिए साहस, रणनीति, नेतृत्व और आत्मविश्वास की प्रेरणा हैं। उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि किसी भी चुनौती के सामने अपनी क्षमता पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। परिस्थितियां हमेशा हमारे पक्ष में हों, यह आवश्यक नहीं; लेकिन अपनी तैयारी, बुद्धिमत्ता और साहस को परिस्थितियों के अनुसार ढालना हमारे हाथ में है। आज के युवा यदि यशवंत राव होलकर के जीवन से आत्मविश्वास, रणनीतिक सोच, नेतृत्व और संघर्ष करने की क्षमता सीखें तो वे अपने जीवन में नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकते हैं।
इतिहास जानना क्यों जरूरी है : जिस युवा को अपना इतिहास नहीं मालूम, वह दूसरों द्वारा बनाई गई धारणाओं से आसानी से प्रभावित हो सकता है। इसलिए हमारा पहला मंत्र होना चाहिए—‘पहले जानो, फिर मानो।’ अपने इतिहास को जानो। अपने महापुरुषों को पढ़ो। उनके संघर्षों को समझो। उनकी सफलताओं के साथ उनकी चुनौतियों को भी समझो। फिर उनके जीवन से अपने समय के लिए उपयोगी सीख निकालो। इतिहास का उद्देश्य केवल अतीत पर गर्व करना नहीं है। इतिहास हमें यह समझाने के लिए है कि हमारे पूर्वजों ने कठिन परिस्थितियों में क्या किया और हम वर्तमान की चुनौतियों से कैसे सीख सकते हैं।
जागरूकता से जागृति और जागृति से परिवर्तन : आज हमारे समाज को सबसे अधिक आवश्यकता जागरूकता और जागृति की है। जागरूकता का अर्थ है—हमें यह पता हो कि हमारे आसपास क्या हो रहा है। जागृति का अर्थ है—उस जानकारी को समझकर सही दिशा में कदम उठाना। केवल सोशल मीडिया पर किसी विचार को पढ़ लेना जागरूकता नहीं है। केवल किसी महापुरुष की तस्वीर साझा कर देना जागृति नहीं है। वास्तविक जागृति तब होगी जब हम उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे। युवा शिक्षा के प्रति जागरूक हों। रोजगार और कौशल के प्रति जागरूक हों। अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों। अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक हों। अपने इतिहास और संस्कृति के प्रति जागरूक हों। सबसे महत्वपूर्ण—अपने समाज की समस्याओं और उनके समाधान के प्रति जागरूक हों। युवा अपना रास्ता स्वयं बनाएं। आज का युवा अनेक प्रकार के दबावों से घिरा हुआ है। सोशल मीडिया की चमक, दिखावे की संस्कृति, दूसरों से तुलना और तत्काल सफलता की मानसिकता उसके सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में हमारे युवाओं को यह समझने की आवश्यकता है कि जीवन में सफलता का कोई एक निश्चित रास्ता नहीं होता। रास्ते खोजने पड़ते हैं, रास्ते बनाने पड़ते हैं। चंद्रगुप्त मौर्य से संगठन सीखें। सम्राट अशोक से सकारात्मक परिवर्तन और लोककल्याण सीखें। मल्हार राव होलकर से संघर्ष और नेतृत्व सीखें। भीमाबाई होलकर से साहस और स्वाभिमान सीखें। यशवंत राव होलकर से रणनीति, आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच सीखें। इन महापुरुषों की नकल करने की आवश्यकता नहीं है; आवश्यकता है उनके गुणों को समझकर अपने समय के अनुसार अपने जीवन में उतारने की।
युवा शक्ति को सही दिशा देना समाज की जिम्मेदारी : युवा ऊर्जा अपने आप में शक्ति है, लेकिन उस शक्ति को सही दिशा देना आवश्यक है। ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगे तो निर्माण करती है और गलत दिशा में जाए तो विनाश भी कर सकती है। इसलिए परिवार, समाज, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को केवल उपदेश न दें, बल्कि उन्हें इतिहास, शिक्षा, कौशल, संस्कार, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ें। युवाओं को सवाल पूछने दें, उन्हें सोचने दें, उन्हें पढ़ने दें, उन्हें इतिहास समझने दें, उन्हें अपनी गलतियों से सीखने दें और सबसे महत्वपूर्ण—उन्हें अपना रास्ता बनाने का अवसर दें। आज की युवा शक्ति ही कल का इतिहास लिखेगी। इतिहास केवल राजाओं और साम्राज्यों से नहीं बनता। इतिहास उन लोगों से भी बनता है जो अपने समय की चुनौतियों को स्वीकार करके परिवर्तन की शुरूआत करते हैं। आज का युवा यदि जाग गया, तो परिवार बदलेगा। परिवार बदलेगा तो समाज बदलेगा। समाज बदलेगा तो राष्ट्र मजबूत होगा। इसलिए आवश्यकता है कि हमारी युवा शक्ति केवल अपने व्यक्तिगत भविष्य के बारे में न सोचे, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य के बारे में भी विचार करे। जागो, पढ़ो, समझो और आगे बढ़ो। अपने महापुरुषों को जानो, उनके संघर्षों से सीखो, अपनी कमियों को पहचानो, अपने भीतर की क्षमता को पहचानो और किसी के बनाए रास्ते पर आंख बंद करके चलने के बजाय—अपना रास्ता खुद बनाने की कोशिश करो। क्योंकि ‘जिस ओर युवा शक्ति चलती है, उस ओर जमाना चलता है।’ जब युवा शक्ति के साथ जागरूकता, जागृति, शिक्षा, संगठन, संस्कार और सकारात्मक सोच जुड़ जाती है, तब केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता पैदा होती है। जागो और जगाओ। पहले जानो, फिर मानो। सोच बदलो, सबकुछ बदलेगा। युवा जागेगा—समाज जागेगा। समाज जागेगा—राष्ट्र आगे बढ़ेगा।
-शेफर्ड नन्दकिशोर धनगर
मो. 9810624224
जिस ओर युवा शक्ति चलती है, उस ओर जमाना चलता है!
आभार व धन्यवाद जी