रक्षाबंधन वैचारिक मंथन ये
अनुपम कितना पावन।
बहिना-भैया के भावों का ये
पर्व अनूठा मनभावन।
मनन करो इस चिंतनीय अब
प्रासंगिकता पर द्दढ़ हो,
आया कैसा वक्त भयावह है
प्रतिपल होता उन्मूलन।
-डॉ राजेंद्र मिलन
मिलन मंजरी, आजादनगर, खंदारी, आगरा-2
मो. 9808600607
रक्षाबंधन
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