वाराणसी। राष्ट्र उदय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान, उत्तर प्रदेश के प्रदेश संयोजक बाबूराम पाल ने प्रधानमंत्री के नाम भेजे एक ज्ञापन में भारत में जारी जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग व अति पिछड़ा वर्ग के कालम को जोड़ने, जस्टिस रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट को संसद के पटल पर रखने और आदिवासी धर्म कोड को जनगणना में शामिल करने की मांग की है। जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि देश में जारी जनगणना में 14 अगस्त 2026 को गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी राजपत्र में बिंदु संख्या 10 पर जाति कालम में अन्य पिछड़ा वर्ग का कालम नहीं जोड़ा गया है। यह गृह मंत्रालय द्वारा देश की संसद में जातिगत जनगणना कराने और उसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के कालम को जोड़ने की घोषणा के अनुरूप नहीं है। इसलिए तत्काल 14 अगस्त 2026 को जारी भारत के राजपत्र में संशोधन कर अन्य पिछड़ा वर्ग के कालम को जोड़ा जाए और उसमें अति पिछड़ा वर्ग की भी आर्थिक-सामाजिक स्थिति की जनगणना कराई जाए। 2018 में सरकार ने अति पिछड़ों के सामाजिक अधिकार के लिए जस्टिस रोहिणी कमीशन का गठन किया था जिसने 2023 में अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंप दी है। लेकिन आज तक यह रिपोर्ट संसद के पटल पर नहीं रखी गई। यह अति पिछड़े वर्ग के साथ अन्याय है। इसलिए तत्काल जस्टिस रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट को संसद के पटल पर रखा जाए और अति पिछड़ा वर्ग के अन्य पिछड़ा वर्ग में से आरक्षण कोटे को अलग किया जाए। भारत की जनगणना में 1961 से पहले आदिवासी धर्म कोड का प्रावधान था। जिसे समाप्त कर दिया गया। देशभर के आदिवासी संगठनों की तरफ से लगातार उनकी विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक स्थितियों के अनुरूप आदिवासी धर्म कोड को जनगणना में शामिल करने की मांग की जा रही है। इस मांग से एकजुटता व्यक्त करते हुए भारत में जारी जनगणना में आदिवासी धर्म कोड के कालम को भी जोड़ा जाए। ज्ञापन में आशा व्यक्त की गई है कि प्रधानमंत्री उपरोक्त मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर समुचित कार्रवाई करने का निर्देश प्रदान करेंगे। -ब्यूरो
बाबूराम पाल ने प्रधानमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन-जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग व अति पिछड़ा वर्ग के कालम को जोड़ने की मांग
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