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नशामुक्त जीवन जीने के लिए स्वयं संकल्प लें!

नशे के प्रभाव से राष्ट्र की युवा शक्ति खोखली हो रही है। चाहे वह छात्र वर्ग का हो, चाहे वह किसान वर्ग का हो, चाहे वह मजदूरी करने वाला हो, सभी नशे के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। आप चाहे किसी भी जाति, धर्म और संप्रदाय के हों, नशा सभी के लिए बुरा होता है। ऐसा नहीं है कि इसका दुष्प्रभाव लोग नहीं जानते, फिर भी उसके शिकंजे में फंस जाते हैं। नशा किसी भी प्रकार का यदि अपना लिया और उसकी तलब आपको लग गई तो यह आपको जीने नहीं देगी। नशेबाज स्वयं भी अनुभव करते हैं कि यह ठीक नहीं है। नशे के कारण बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, मनुष्य पागलों जैसा व्यवहार करता है, हिंसा करता है, अपराध करता है, दुर्घटना का शिकार होकर असमय मौत के मुंह में चला जाता है और छोड़ जाता है मां-बाप, पत्नी, बच्चे को रोता हुआ। शराब, गुटखा, तंबाकू, बीड़ी-सिगरेट आदि सभी जानलेवा बीमारियों को न्योता देते हैं। शराब जब व्यक्ति पीता है तो उसका मस्तिष्क सामान्य ढंग से काम नहीं करता और फिर वह नशे के कारण अपराध करता है। दुर्घटना का शिकार हो जाता है। यदि बच जाता है तो विकलांग होकर जीवनभर परेशान रहता है और घर के लोगों को परेशान करता रहता है, यह एक बड़ी विडंबना है।
नशे से बचने के लिए हम क्या करें?
नशे से बचने के लिए हम स्वयं पहल करें। संकल्प लें कि हम बच्चों के समक्ष, परिवार के समक्ष किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेंगे। तभी हम बच्चों को नशामुक्त जीवन शैली के लिए प्रेरित कर सकते हैं। यदि स्वयं नशा करते हैं तो हम उन्हें मना नहीं कर पाएंगे। सामाजिक स्तर पर समाज के पदाधिकारी यदि स्वयं नशा नहीं करते हैं तो वह समाज के माध्यम से जन जागरण अभियान चलाकर लोगों को जागरूक बना सकते हैं। सामाजिक स्तर पर सामूहिक रूप से दबाव बनाने से भी व्यक्तियों में सुधार हो जाता है। वर्तमान में नशामुक्त जीवन जीने के लिए अनेक धार्मिक, आध्यात्मिक संगठन हैं, उनके संपर्क से और सलाह को मान लेने से भी हम नशे से स्वयं को व परिवार को बचा पाने में समर्थ हो सकते हैं। रात्रि में स्वयं घर से ना निकलें, बच्चों को न जाने दें ताकि किसी भी प्रकार के गलत व्यक्तियों की संगत में हम भटक न जाएं अथवा किसी दुर्घटना के शिकार ना हो जाएं। भारत ही नहीं विश्व के अनेक वैज्ञानिकों ने शोध करके बताया है कि नशा कुछ और नहीं है, संक्षेप में यह एक धीमी आत्महत्या है। नशे की सामग्री का सेवन करके व्यक्ति स्वयं ही अपने हाथों स्लो प्वाइजन लेते रहता है जो भविष्य में गंभीर बीमारी के रूप में सामने आता है और व्यक्ति को धन खर्च करने के बाद भी नहीं बचाया जा सकता। सरकार से कोई उम्मीद नहीं की जा सकती। क्योंकि सरकार स्वयं ही उसका राजस्व लाभ के लिए व्यापार कर रही है। शराब के व्यापार में अनेक राजनेता या तो जेल में हैं या जमानत पर। करोड़ों के घपलों में सरकार ही बदल गई है। यह बात लोगों से छिपी नहीं है, फिर भी लोग अपना सुधार नहीं कर पाए क्योंकि वह मानसिक रूप से नशे के कारण कमजोर हो जाते हैं। अंत में हम यही निवेदन करेंगे कि आप अपने परिवार को बचाने के लिए नशामुक्त जीवन जीने के लिए स्वयं संकल्प लें और स्वयं का सुधार करने का अभियान प्रारंभ करें। अपना सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है। हम सुधरेंगे तभी हमारा सुधार होगा। कोई दूसरा आकर हमारी मदद नहीं कर सकता। जिस भी व्यक्ति को यह उचित लगता है वह आज से ही अपने सुधार में लग जाए। इसके माध्यम से ही हम स्वयं और अपने परिवार को नशे के चक्रव्यूह से बाहर निकालने में समर्थ हो सकेंगे अन्यथा नशे के चक्रव्यूह में फंसा हुआ युवा बाहर नहीं आ सकता, कभी नहीं आ सकता। सुझाव हमारा है फैसला आपका।
-नारायण प्रसाद पाली, साहित्यकार
मो. 9575761235

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