देखा मैंने भूतल पर
विस्मय ही विस्मय
कौन चलाता पवन वेग
यह मेरा संशय।।
सूरज की किरणों को पाकर
दूर भागता अंधकार
प्रात: होते ही सूरज करता
जन-जन का सपना साकार
यह देखा मैंने भूतल पर
विस्मय ही विस्मय
किसके कहने से आता सूरज
यह मेरा संशय।।
अंधकार होते ही शशि
करता शीतल छाया।
अपनी पोष्टिक किरणों से
बनाता सबको निरोगी काया।
कोई दूर करें
मेरे मन का संशय
क्यों भरे हुए हैं इस भूतल में
विस्मय ही विस्मय।।
इस विस्मय में किस सत्ता का हाथ
नमन करूं मैं उसके आगे माथ।।
-गिरजेश पाल, जयपुर
मो. 9413672666
यह मेरा संशय!
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