कागज की कश्ती यहांँ,
मिट्टी की पतवार।
परेशान कल के लिए,
बात यही बेकार।।1।।
होंठों पर मुस्कान यदि,
बदला हो व्यवहार।
समझौते हर मोड़ पर,
उसने किए हजार।।2।।
-अमरपाल, अकबरपुर, उन्नाव
मो. 8004449744
‘क्वार’ माह के दोहे!
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