मेरठ। हरिकमल दर्पण के संरक्षक सूबेदार मेजर (से.नि.) हरपाल सिंह पाल ने जनसमस्याओं को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शहर में विकास कार्यों के साथ कुछ व्यावहारिक कठिनाइयाँ भी सामने आ रही हैं। प्राय: देखा गया है कि विभिन्न एजेंसियों द्वारा सड़क खोदने के बाद उसके पुन: सुधारीकरण में अपेक्षा से अधिक समय लग जाता है। खिर्वा रोड, शगुन मंडप के आसपास का क्षेत्र इसका एक उदाहरण है और कुछ क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटों के रख-रखाव में भी विलंब होता है। उदाहरण के लिए, न्यू सैनिक कॉलोनी (बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों के निवास स्थान) की गली नं. 1, 2, 3 तथा खिर्वा रोड क्षेत्र में पिछले 4 वर्षों से स्ट्रीट लाइटों की आवश्यकता बनी हुई है। उक्त संबंध में उन्होंने वार्ड-41 के पार्षद को जनहित की इस पीड़ा से अवगत कराया। उन्होंने इस विषय में महापौर और विधायक को भी पत्र लिखा। उनका कहना है कि दैनिक जन-सुविधाओं जैसे प्रकाश, सड़क, जल-निकासी को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा जाए, भले ही ऐसी योजनाओं में सरकार द्वारा कटौती कर दी जाए जिनका कुछ लोग दुरुपयोग कर अनुचित लाभ उठाते हैं। असमय में यूपीआई पर सुविधा शुल्क लगने से भी सभी वर्गों को पीड़ा हुई है। चुनाव के समय मतदाता जब दलों के कार्यकर्ताओं से सवाल करेंगे तो उसका जवाब कौन देगा? सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के पश्चात वैध-अवैध भूमि एवं निर्माण को लेकर जो संकट और पीड़ा पहले शास्त्रीनगर में थी, वह अब पूरे मेरठ और चारों दिशाओं की कॉलोनियों में व्याप्त हो गई है। यदि शहर में भी आवासों एवं प्रतिष्ठानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई हुई तो असंख्य आमजन आवास-विहीन होकर सड़क पर आ जाएंगे। बेरोजगारी के दौर में इससे व्यापारियों एवं सामान्य परिवारों की आजीविका पर भीषण आघात पड़ेगा। विगत 30-35 वर्षों में बसी अनेक कॉलोनियों जैसे उल्देपुर आदि में मध्यमवर्गीय परिवारों ने अपनी जीवनभर की पूंजी लगाकर प्लॉट और घर खरीदे हैं, वहाँ बुलडोजर चलने से चिंता व्याप्त है। नागरिकों का यह प्रश्न भी स्वाभाविक है कि जब इन संपत्तियों को बार-बार खरीदने-बेचने पर रजिस्ट्री में स्टाम्प ड्यूटी और प्रतिवर्ष हाउस टैक्स लिया जाता रहा है तो अब इनके नियमितीकरण का कोई जनहितकारी मार्ग निकाला जाना चाहिए, अन्यथा इसका प्रभाव आगामी चुनाव पर निश्चित रूप से पड़ेगा। कानून जनकल्याण के लिए ही बनता है और जनहित में उसमें समयानुसार संशोधन व नियमितीकरण का प्रावधान होता आया है और अब भी होना चाहिए। एमडीए की नई आवास योजनाएँ 15/20 वर्षों से स्थगित होने से जनता के पास बाहर जाकर प्राइवेट में प्लॉट-मकान खरीदने का ही सीमित विकल्प बचा था। ऐसे में सरकार से अपेक्षा है कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बसी-बसाई कॉलोनियों के नियमितीकरण पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना 50 वर्षों से अधिवक्ताओं और आमजन की एक पुरानी माँग रही है। 21 सितंबर को शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन में भी यह विषय मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया। मुख्यमंत्री ने इसे न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र का विषय बताया। जनता को विश्वास है कि केंद्र व राज्य सरकार के समन्वित प्रयास से इस दिशा में भी सकारात्मक मार्ग निकलेगा। इसके साथ ही कुछ समस्याएँ नागरिक जागरूकता से भी जुड़ी हैं, जैसे बाइकों में तेज आवाज वाले साइलेंसरों का प्रयोग और नालों में कचरा डालना। प्रशासन के प्रयासों के साथ-साथ हम नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। हमें अपने भवनों का निर्माण मानकों के अनुरूप करना चाहिए ताकि भविष्य में जनहानि की आशंका न रहे। दिल्ली में हाल में हुई जर्जर भवन की घटना हम सबके लिए एक सीख है। समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन और नागरिकों का परस्पर सहयोग ही सबसे प्रभावी मार्ग है। -ब्यूरो
सूबेदार मेजर (से.नि.) हरपाल सिंह पाल ने जनसमस्याओं को लेकर जताई चिंता
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