लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 10 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश पुलिस में आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में 15 पूर्व सैनिकों को अंतरिम राहत देते हुए शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा में शामिल होने मात्र से याचियों को पात्रता का कोई विशेष अधिकार नहीं मिल जाएगा। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने मनोज कुमार पांडेय और 14 अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया। याचियों का कहना था कि उन्होंने लिखित परीक्षा और अभिलेख सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, लेकिन रक्षा सेवाओं से स्वेच्छा से मुक्त होने के आधार पर उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया गया। याचियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देकर कहा गया था कि निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर पेंशन अर्जित करने वाले सैन्यकर्मियों को केवल इस आधार पर पूर्व सैनिकों के आरक्षण लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि उन्होंने नियोक्ता की सहमति से स्वेच्छा से सेवा छोड़ी थी। राज्य सरकार ने दलील दी कि याचीगण संबंधित नियमों में निर्धारित पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करते हैं और चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में अदालत पहुंचे हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि संबंधित प्रविधान के प्रथमदृष्टया पढ़ने पर याचियों की पात्रता पर सवाल उठता है, लेकिन मामले पर विचार आवश्यक है। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 10 दिन और याचियों को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी। इस मामले में याचियों की ओर से समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्टÑीय अध्यक्ष एडवोकेट के.के. पाल ने दमदार पैरवी की जिसके कारण हाईकोर्ट ने उक्त आदेश दिया। -ब्यूरो
यूपी पुलिस सिपाही भर्ती में एडवोकेट के.के. पाल ने दिलाई पूर्व सैनिकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
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