आज भारतीय सामाजिक व्यवस्था ऐसे दौर से गुजर रही है, जिसके लिए मैं भी अक्सर कहता हूँ कि लेखक जो समाधान के साथ लिखता है वह पूर्ण है, समझने वाले आगे आयें, प्रयोग करें, क्या अम्बेडकर साहब सब कुछ कर दिए थे? उन्होंने तो अपनी सोच से पार्लियामेंट का त्याग ही कर दिया था। अंतिम समय में उन्होंने बहुत दु:खी होकर यह बात कही थी कि हिन्दुओं में सनातन की समझ नहीं है और न जल्दी होगी। इस प्रकार इनके द्वारा अनुपालना न करने के कारण बौद्ध धर्म सबके लिए दिया जो अपने भारत देश के क्षत्रिय राजा बुद्ध ने ही सब त्याग कर समानता व मानवता की रक्षा के लिए नए सिद्धांतो के साथ दिया था। मैं स्वीकार करता हूँ कि वह उस समय व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह ही था जैसा आज चल रहा है जंतर मंतर पर। आप लोग जा नहीं सकते तो लिखें, क्रांति तो शब्दों से ही होती है। शब्द रहस्य हैं, चेतना के यह ब्रह्म भी हैं, शब्द की अनुपालना राम किये तो राजा से भगवान बने। विचार क्रांति सबसे बड़ी क्रांति है।
–जगदीश प्रसाद पाल, उन्नाव
परास्नातक जनसंचार
मो. 9794866822
विचार क्रांति सबसे बड़ी क्रांति है!
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