ग्लोबल वार्मिंग, ताप-वृद्धि, गलाए ग्लेशियर!
झीलें मैदानी तटों पे, बन रहीं जल भर कर!!
कम जो होती बर्फबारी, ग्लेशियर बीमार हो
तापमान के बढ़ने से, हिम-पर्वत जल-धार हो
सागर का तल बढेÞ, ढहें हिम-खंड पिघलकर!
झीलें मैदानी तटों पे, बन रहीं जल भर कर!!
पहाड़ों से चट्टान मिट्टी, पेड़-पौधे आ गिरें
आपदाएँ बन के जंगल, बस्तियाँ जीवन हरे
हिमाद्रि पिघलकर, बाढ़ बन ढाएँ कहर!
झीलें मैदानी तटों पे, बन रहीं जल भर कर!!
बाढ़ लाई गाद, मिट्टी, बांध के लिए काल हों
बिजली उत्पादन प्रभावित, व्यवस्था बदहाल हो
हिमाचल क्षेत्रों में नित, रहे भू-धँसाव का डर!
झीलें मैदानी तटों पे, बन रहीं जल भर कर!!
जीवाश्म-ईंधन जब जले, गगन जहरीला हो
औद्योगीकरण, जंगल, पर्वतों पे बला हो
कार्बनिक गैसों का बादल, गर्मी रखता भू पर!
झीलें मैदानी तटों पे, बन रहीं जल भर कर!!
भीषण-सूखा, बाढ़-ग्रस्त, चक्रवाती घटनाएँ
जलवायु परिवर्तन से, भौगोलिक आपदाएँ
औसत-गर्मी में वृद्धि, खड़ी चुनौती बनकर!
झीलें मैदानी तटों पे, बन रहीं जल भर कर!!
सोलर-ऊर्जा, पवन-चक्की, अपनाएँ हम सभी
वन को संरक्षित करें, दस पेड़ रोपें हम सभी
कार्बनिक गैसों को रखते, वृक्ष नियंत्रण पर!
झीलें मैदानी तटों पे, बन रहीं जल भर कर!!
भू-मंडल की ताप-वृद्धि, पिघलाएँ ग्लेशियर!
झीलें मैदानी तटों पे, बन रहीं जल भर कर!!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985
भू-मंडल की ताप-वृद्धि!
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