अब राजनीति में भी गडरिया समाज का दबदबा बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में प्रकाश पाल को राज्यसभा सांसद बनाया है। भाजपा से गडरिया समाज के तीन नेता पहले ही राज्यसभा में हैं जिनके नाम क्रमश: आर. कृष्णैया (आन्ध्र प्रदेश), एम. नागराज (कर्नाटक) तथा रामाराव बड़कुटे (महाराष्टÑ) हैं। इस प्रकार राज्यसभा में भाजपा के चार सांसद गडरिया समाज से हो गए हैं। इससे पहले पद्मश्री डा. विकास महात्मे एवं बाबूभाई देसाई को भी भाजपा ने राज्यसभा भेजा था जिनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। लोकसभा में पिछले काफी समय से प्रो. एस.पी. सिंह बघेल गडरिया समाज का चेहरा बने हुए हैं जिन्हें केन्द्र सरकार में निरंतर मंत्री पद मिलता रहा है। जहां तक अन्य दलों की बात है, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने श्यामलाल पाल व बसपा ने विश्वनाथ पाल को प्रदेश अध्यक्ष का पद देकर गडरिया समाज का मान बढ़ाया है। इससे पूर्व अपना दल (एस) ने पूर्व विधायक राजकुमार पाल को लम्बे समय तक प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखा था। हालांकि अब राजकुमार पाल ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। उत्तर प्रदेश में राष्टÑ उदय पार्टी, राष्टÑीय समाज पक्ष, राष्टÑीय शोषित समाज पार्टी सहित कई अन्य राजनीतिक दल भी गडरिया समाज के दम पर राजनीति कर रहे हैं। निश्चित रूप से राजनीति में गडरिया समाज का दबदबा बढ़ रहा है लेकिन इसका समुचित लाभ समाज को नहीं मिल पा रहा है क्योंकि बड़े राजनीतिक दलों से जुड़े समाज के नेता अपने समाज की भलाई के बारे में न सोचकर केवल पार्टी हित में ही काम करते हैं। यदि ये नेता समाज की भलाई के बारे में भी सोचें तो ज्यादा अच्छा हो।
इस हफ्ते इन्हीं शब्दों के साथ जय पाल समाज!
-निरंजन सिंह पाल
राजनीति में बढ़ता दबदबा!
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वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय समाज पक्ष को मजबूत किये जाने की आवश्यकता है,