केवल भौतिक सुख-सुविधा पर,
खर्च न कर नादान!
है मानव जीवन मूल्यवान!!
आत्म-अवलोकन, चेतना पर भी
रख निज-ध्यान!
है मानव जीवन मूल्यवान!!
तेरी असंख्य उलझनें हैं,
दुख-सुख के फंदे
भौतिक साधन सुविधाएँ,
सब-के-सब हथकंडे
आत्मतत्व की गहरी प्यास,
न होती शांत सुजान!
है मानव जीवन मूल्यवान!!
काम क्रोध ईर्ष्या लोभ की,
जंजीरों में जकड़ा
चेतना को चहुँओर से,
काले सायों ने रगड़ा
दुर्गुण जितने तुच्छ लगें,
ढीठ भी उतने जान!
है मानव जीवन मूल्यवान!!
कामना तन को निर्बल करती,
मन को चलायमान
क्रोध विवेक को नष्ट करता,
मोह दे झूठ को मान
ईर्ष्या अग्नि जीवित देह को,
फूँकती चिता समान!
है मानव जीवन मूल्यवान!!
हर विकार शत्रु सम सारे,
जीवन नरक बनाएं
आत्मसंयम सेवा करुणा,
सद्गुण मित्र बचाएं
सत्प्रवृत्तियों का संवर्धन,
श्रेष्ठ जनों की शान!
है मानव जीवन मूल्यवान!!
सच्चा सुख और शांति मिलती,
जब स्वतंत्र हो मन
यह स्वतंत्रता नहीं बाहरी,
शुद्ध हो अंतर्मन
मुक्ति मार्ग नहीं जटिल प्रक्रिया,
सहज एक विज्ञान!
है मानव जीवन मूल्यवान!!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985
मानव जीवन मूल्यवान!
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