मेरा मन डूब रहा है
अनजाने अंधकार में
मेरी सारी कोशिशें
मेरे सारे प्रयास
बेकार हो रहे हैं।
टूट रहा है बार-बार
मनोबल!
सांसारिक आघात
अपनों का दगा
जब मिलता है
बड़े-बड़े योद्धा
धराशायी हो जाते हैं।
लेकिन मुझे
उबरना है
इस कठिन दौर से गुजरकर
बाहर निकलना है
सीने का दर्द सीने में ही सहना है…
मौन रहकर
मुकाबला करना है
अपने हालातों से
मुझे जीना है
मर-मर कर ही सही
खुद को खुद ही समझाना है।
-मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
गांव-रिहावली, डाक-तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा-283111
मो. 9627912535
मुझे जीना है!
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