मुंबई। ‘जातिगत जनगणना करेंगे, ओबीसी को न्याय देंगे, जनसंख्या के अनुपात में अधिकार देंगे’ ऐसे आश्वासन देकर वर्षों से वोट लिए गए। लेकिन 14 अगस्त 2026 को प्रकाशित भारत सरकार के राजपत्र में ओबीसी के लिए अलग कॉलम ही नहीं है। फिर ओबीसी की वास्तविक संख्या सामने कैसे आएगी? ऐसा सीधा सवाल राष्ट्रीय समाज पक्ष के संस्थापक अध्यक्ष महादेव जानकर ने सरकार से किया है। महादेव जानकर ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘राजपत्र में प्रश्नावली में एससी, एसटी और ‘अन्य’ हैं। लेकिन देश के सबसे बड़े सामाजिक घटक ओबीसी के लिए अलग और स्पष्ट दर्जा कहाँ है? केवल जाति पूछ लेने से जातिगत जनगणना पूरी हो जाती है, ऐसा नहीं है। आंकड़ों के बिना अधिकार कैसे मिलेगा?’ महादेव जानकर ने सरकार से 6 सवाल पूछे हैं-देश में ओबीसी की वास्तविक जनसंख्या कितनी है, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में ओबीसी का प्रतिनिधित्व कितने प्रतिशत है, आरक्षण का लाभ वास्तव में कितने ओबीसी लोगों तक पहुँचा है, ओबीसी की कौन-कौन सी जातियाँ सबसे अधिक पिछड़ी हुई हैं, ओबीसी के लिए योजनाएँ और बजट किस आंकड़े के आधार पर तय किए जाएंगे, यदि स्टैंडर्ड कास्ट कोड नहीं दिया गया, तो अंतिम आंकड़ों में ओबीसी फिर ‘अन्य’ में गायब नहीं हो जाएगा?’ उन्होंने सरकार पर हमला करते हुए कहा, ‘हर व्यक्ति की जाति दर्ज की गई, लेकिन उसे ओबीसी के रूप में आधिकारिक पहचान नहीं दी गई, तो यह धोखा है।’ महादेव जानकर ने ओबीसी समाज की ओर से सरकार के सामने 7 मांगें रखी हैं-ओबीसी के लिए अलग और स्पष्ट पहचान होनी चाहिए, केंद्र और राज्यों की आधिकारिक ओबीसी सूचियों को आधार बनाया जाए, प्रत्येक ओबीसी जाति को अलग स्टैंडर्ड कास्ट कोड दिया जाए, ओबीसी, एससी और एसटी के आंकड़े अलग-अलग जारी किए जाएँ, वैज्ञानिक तरीके से स्टैंडर्डाइजेशन और वेरिफिकेशन किया जाए, अंतिम जातिगत आंकड़े पारदर्शी तरीके से जारी किए जाएँ, इन्हीं आंकड़ों के आधार पर शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और कल्याणकारी नीतियाँ तय की जाएँ।’ महादेव जानकर ने कहा कि ‘आश्वासन नहीं, गिनती चाहिए। वर्षों से कहा गया—आपकी जाति की गिनती की जाएगी और आपको न्याय मिलेगा। तो आज हमारा सीधा सवाल है—हमारी संख्या स्पष्ट रूप से गिनी जाएगी या फिर ‘अन्य’ के नाम पर हमारा आंकड़ा दबा दिया जाएगा?’ जानकर ने कहा, ‘यह किसी एक राजनीतिक दल का प्रश्न नहीं है। यह देश के करोड़ों ओबीसी लोगों के सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकार का प्रश्न है।’ उन्होंने अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा, ‘हमें घोषणाएँ नहीं, आधिकारिक आंकड़े चाहिएं। हमें केवल वोट के लिए इस्तेमाल मत कीजिए, बल्कि हमारे अधिकारों की वास्तविक गणना कीजिए। यदि जातिगत जनगणना करनी है, तो ओबीसी की स्वतंत्र, स्पष्ट, वैज्ञानिक और प्रमाणित गणना होनी ही चाहिए।’ -ब्यूरो
महादेव जानकर का सरकार से सीधा सवाल-ओबीसी की अलग गणना नहीं तो जातिगत जनगणना का फायदा क्या?
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