बहुत समय पहले की बात है। एक घर में रहने वाले चूहे ने देखा कि मालिक बाजार से एक चूहेदानी लेकर आया है। यह देखकर वह घबरा गया। उसे लगा कि अब उसकी जान खतरे में है। वह तुरंत मदद के लिए पहले कबूतर के पास गया और बोला— ‘मुझे बचाओ, घर में चूहेदानी आ गई है।’ कबूतर ने लापरवाही से कहा—‘इससे मुझे क्या खतरा? यह तुम्हारी समस्या है।’ चूहा फिर मुर्गे के पास गया, लेकिन वह भी बोला—‘अभी मैं व्यस्त हूँ, तुम खुद ही देखो।’ आखिर में वह बकरे के पास गया, लेकिन बकरा हंसते हुए बोला—‘चूहेदानी से मुझे क्या लेना-देना? यह तुम्हारा मामला है।’ तीनों की बात सुनकर चूहा निराश होकर अपने बिल में लौट गया। रात को अचानक चूहेदानी में कुछ फँसने की आवाज आई। घर के लोगों ने सोचा कि चूहा पकड़ा गया है, लेकिन उसमें एक सांप फँस गया था। अज्ञानवश घर की बच्ची ने उसे छू लिया और वह घायल हो गई। यह देखकर चूहा समझ गया कि अब बात बहुत गंभीर है। उसने तुरंत इधर-उधर दौड़कर घरवालों का ध्यान आकर्षित किया और उन्हें सतर्क किया। समय रहते सभी सावधान हो गए और बच्ची को सही उपचार मिल गया। अब घर में राहत का माहौल था। तभी परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य ने सबको समझाया—‘देखो, यह संकट सिर्फ एक का नहीं था। अगर समय पर ध्यान न दिया जाता, तो किसी को भी नुकसान हो सकता था। हम सब एक-दूसरे से जुड़े हैं।’ यह बात सुनकर कबूतर, मुर्गा और बकरा भी अपनी गलती समझ गए। उन्हें एहसास हुआ कि अगर वे पहले ही चूहे की मदद कर देते, तो यह स्थिति ही न बनती। धीरे-धीरे सब सामान्य हो गया, लेकिन यह घटना सबके लिए एक गहरी सीख बन गई।
प्रस्तुति : श्याम शंकर पाल उर्फ सचिन
हरिकमल दर्पण हरियाणा प्रभारी
पाल एकता मंच राष्ट्रीय सचिव
भारतीय जीवन बीमा निगम
सीनियर इंश्योरेंस एडवाइजर
मो. 9891441417, 9999007349
चूहेदानी…
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