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बच्चों के पढ़ाई में परिणाम कैसे भी हों, मनोबल बढ़ाएं!

हर परिवार के मुखिया आजकल बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, पैसा भी खर्च कर रहे हैं। यहां तक कि शिक्षा अच्छी से अच्छी दिलाने के लिए रात-दिन कमाई करके अपने निवास से दूर भी होस्टल आदि की सुविधा देकर होनहार बच्चों का अच्छा भविष्य बना रहे हैं। ऐसा करने पर बच्चे आत्मनिर्भर बनने की राह अपनाने में सफल हो रहे हैं। जैसे स्कूल में पढ़ते-पढ़ते एनडीए, नर्स, डॉक्टर, प्रशासनिक अधिकारी, अच्छे खिलाड़ी आदि बन जाते हैं, मां-बाप, परिवार का नाम रोशन करते हैं। जब बच्चे हमारा नाम रोशन करते हैं तो हमारी भी जिम्मेदारी बनती हैं कि उनका हौसला बढ़ाने के लिए अपने-अपने घर पर बच्चों का रिजल्ट आने पर एक त्यौहार जैसा माहौल बनाकर उन्हें अपने हाथ से प्रशस्ति पत्र देकर उत्साहित करें। कम नम्बर भी बच्चा लेकर आता है तब भी पुरस्कार दें। उन्हें पढ़ाई को बोझ न बनाकर मनोरंजक बनायें। खेल-खेल में पढ़ायें। उनको प्रोत्साहित करने के लिए छोटे-छोटे टिप्स दें। इससे उनमें गलत कदम उठाने की प्रवृत्ति नहीं बढेÞगी। 99% अंक लाने के लिए शुरूआत से ही एनसीईआरटी की किताबों पर आधारित हर टॉपिक के स्पष्ट कॉन्सेप्ट्स, नियमित सेल्फ-स्टडी (4-8 घण्टे) और 1 दिन, 3 दिन, 7 दिन के अंतराल पर रिवीजन अनिवार्य है। पिछले वर्षों के पेपर, मांक टेस्ट, लिखकर अभ्यास करने और लिखकर याद करने से टॉपर बनने की संभावना ज्यादा बनती है।
-धनगर गंगा विष्णु चन्देल
तहसीलदार, दिल्ली सरकार
मो. 9899641263

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