हम लोग समाज के ग्रुपों से जुड़े हुए हैं। मैं देखता हूं कि ग्रुपों में समाज का कोई भी आदमी अच्छा काम करता है तो उसको धन्यवाद तक नहीं करते हैं। जो काम अच्छा करता है उसका हौंसला बढ़ाना चाहिए ताकि वह और भी काम समाज के लिए ज्यादा करे। परंतु ऐसा कुछ ग्रुप में देखने को नहीं मिलता है। हम लोगों में दीमक की तरह एक बीमारी लगती जा रही है कि यह व्यक्ति इतना काम क्यों कर रहा है, इसकी जिंदगी अच्छे से क्यों गुजर रही है। मेहनत का फल मिलता है, परंतु देर से मिलता है। हम लोगों को काम करने वाले का हौंसला बढ़ाना चाहिए। आप लोग एक-दूसरे की टांग खींचने में माहिर हो, आप लोगों ने कभी नहीं सोचा कि हम भी समाज का सच्ची आत्मा से काम करें। परंतु आप लोग एक-दूसरे से बहुत जलते हैं कि यह आदमी इतना काम क्यों कर रहा है, इसकी इतनी बड़ी पकड़ क्यों है, यह आदमी हमसे आगे क्यों निकल गया। आप लोग घर बैठे-बैठे आगे कैसे निकल सकते हैं? कुछ करना होगा, परंतु आप लोग हार मानकर घर में बैठे हुए हैं कि हम कुछ कर ही नहीं सकते हैं। समाज के लिए आप लोगों की सोच ऐसी है। क्या आपको भगवान ने एक जिम्मेदारी दी है कि किसी दूसरे के काम में टांग खींचना है? आखिर क्यों ऐसा हो रहा है?
-सतीश बघेल, पलवल
मो. 8930069689
काम करने वाले का हौंसला बढ़ाना चाहिए!
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