धनगर गडरिया समाज राष्ट्र के विभिन्न राज्यों में निवास करने वाला समाज है। विभिन्न राज्यों में इसकी स्थिति बड़ी संख्या में है किंतु आज तक इसके सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक चेतना का शासन द्वारा ठीक से मूल्यांकन नहीं होने के कारण यह समाज अपनी राजनीतिक पहचान बनाने में कामयाब नहीं हो पाया। किंतु शिक्षा, संस्कार, संस्कृति और टेक्नोलॉजी के कारण युवा वर्ग इस दिशा में बहुत ही अच्छे ढंग से तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ में धनगर गडरिया समाज सदियों से निवास कर रहा है। ऐतिहासिक परिस्थितियों का अध्ययन करने से यह ज्ञात होता है कि यह धनगर गडरिया समाज महाराष्ट्र नागपुर क्षेत्र से छत्तीसगढ़ जिसे कौशल राज्य कहा जाता है वहां पशुपालन और रोजगार के दृष्टिकोण से घुमंतू समाज होने के कारण यहां आया और फिर यहीं का होकर रह गया। धनकर गडरिया समाज को छत्तीसगढ़ में बोलचाल की भाषा में (ढेंगर) कहा जाता है। यह समाज मूलत: भेड़पालन, कंबल उद्योग, गोपालन, कृषि जैसे कार्यों में आदिकाल से लगा हुआ है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, रायपुर, कबीरधाम, दुर्ग, भिलाई, धमधा गंडई, राजनांदगांव, खैरागढ़, तखतपुर, मुंगेली, पंडरिया, पथरिया, लोरमी आदि क्षेत्रों में बड़ी संख्या में निवास करता है। समाज की अनुमानित जनसंख्या विभिन्न जिलों के अनुसार 25 से 30 हजार की होगी। धनगर गडरिया समाज की राजनीतिक स्थिति छत्तीसगढ़ में नहीं के बराबर है। बहरहाल अब राजनीतिक चेतना का जागरण होने से ग्राम पंचायत, जनपद में भाई-बहन प्रयासरत हैं। धनगर समाज छत्तीसगढ़ में अभी वर्तमान में कोई भी कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक जैसे बड़े प्रशासनिक पदों पर नहीं है। बड़े उद्योग अथवा लघु उद्योग में भी हमारे धनकर गडरिया समाज छत्तीसगढ़ के लोग नहीं हैं। कृषि मजदूरी और छोटे कर्मचारी के रूप में ही कार्य कर रहे हैं। धनगर गडरिया समाज को आरक्षण अन्य पिछड़ा वर्ग में मिला हुआ है। इसके अतिरिक्त भी अन्य गडरिया समुदाय छत्तीसगढ़ में निवास करते हैं जैसे-झेरिया गडरिया समाज, निखर गडरिया समाज, झाडे धनगर गडरिया समाज, देसहा गडरिया समाज, वराडे गडरिया समाज आदि। उनकी स्थिति भी हमारे धनगर गडरिया समाज की तरह ही है। धीरे-धीरे उनमें आना-जाना और परिचय हो रहा है। सर्व गडरिया समाज महासंघ का गठन भी किया गया है जिसके प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता अजय हंसा रायपुर निवासी हैं। धनगर गडरिया समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद राम हैं। धनगर गडरिया समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और राजनीतिक परिदृश्य में आगे आकर काम करना होगा और इसे राष्ट्रीय स्तर पर संगठित होना होगा। राष्ट्र के विभिन्न राज्यों में धनगर गडरिया समाज को संगठित करना एक बड़ा काम है। इसके माध्यम से हम अपनी सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती के साथ प्रस्तुत कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ सहित राष्ट्र के समस्त धनगर भाई-बहनों से अनुरोध है कि वह समाज के हित में सामाजिक एकता और संगठन को प्राथमिकता दें।
-नारायण प्रसाद पाली, (साहित्यकार)
मो. 9575761235
सामाजिक एकता और संगठन को प्राथमिकता दें!
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