आजकल हमारे गड़रिया समाज में मूर्तिपूजा अन्ध आस्था पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। अन्धविश्वास, पाखण्ड व ढोंग किसी भी समाज में वह घुन है जो शिक्षा रूपी अनाज को खा जाता है। किसी भी परिवार में गृहणियां अगर शिक्षित हैं तो बच्चों को शिक्षा के मार्ग पर ले जाती हैं और अगर कम शिक्षित या अनपढ़ हैं तो परम्परागत तरीके से चली आ रही अन्धविश्वास की काली छाया बच्चों पर भी पड़ती है। इसलिए बच्चों को शिक्षा रूपी देवी की आराधना करने के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए। शिक्षा की देवी मां को अपन-अपने घरेलू मन्दिरों में रखें और बच्चों को बताएं कि शिक्षा पर मेहनत की तो बार-बार प्रयास से सफलता अवश्य मिलेगी, हताश नहीं होना चाहिए। अगर हम अपने बच्चों का उत्साह बढ़ाएंगे तो जरूर समाज के बच्चे दूसरे समाज के बच्चों से कॉम्पटीशन कर अच्छी सेवा में जा सकते हैं। आज जरूरत है समाज में अन्धभक्ति से बचकर शिक्षा भक्ति की तरफ बच्चों को ले जाएं। मन्दिरों में या मूर्तियों पर पैसा चढ़ाने से वहां बैठे मुफ्तखोर ही चट कर जाते हैं। समाज को राजनीतिक, शैक्षिक, व्यापारिक प्रशासनिक सेवाओं जैसे मुकाम हासिल होंगे क्योंकि शिक्षा से सोचने के सुविचार विकसित होते हैं। सही कहा है कि शिक्षित व एकजुट समाज ही मजबूत समाज होता है।
-सतबीर बघेल, जेवर
मो. 8800120437
अन्धविश्वास, पाखण्ड व ढोंग से बच्चों को बचाएं!
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