भारत में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण जी का जंजाल बन गया है। एक लम्बे संघर्ष के बाद देश में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण मिला था, हालांकि ओबीसी की जनसंख्या लगभग 52 फीसदी है। फिर भी केन्द्र से लेकर विभिन्न प्रदेश सरकारों ने इस 27 प्रतिशत आरक्षण का भी पूरा लाभ ओबीसी को नहीं दिया। भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा देश में जनगणना के लिए जो फार्म तैयार किया गया है उसमें ओबीसी का कालम ही नहीं है जिससे इस जनगणना का कोई लाभ ओबीसी को मिलने वाला नहीं है। ओबीसी समाज जनगणना के फार्म में ओबीसी के लिए अलग कालम की मांग कर रहा है लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं है। वैसे भी, ओबीसी आरक्षण अब मात्र झुनझुना ही साबित हो रहा है क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से देखा जा रहा है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम में ओबीसी का कटआफ सामान्य वर्ग के परीक्षार्थियों से भी ऊपर रहता है। ईडब्ल्यूएस का लाभ भी ओबीसी समाज को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अब ओबीसी समाज के सामने बड़ा आंदोलन चलाने के अलावा और कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। भाजपा सरकार ओबीसी की सबसे बड़ी दुश्मन प्रतीत हो रही है लेकिन शायद ओबीसी समाज को अभी यह पूरी तरह समझ नहीं आ रहा है।
इस हफ्ते इन्हीं शब्दों के साथ जय पाल समाज!
-निरंजन सिंह पाल
जी का जंजाल बना आरक्षण!
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