उत्तर प्रदेश में जो लोग पाल, बघेल, गडेरिया और धनगर को एक ही बताते हैं, उनसे बस एक सीधा सवाल पूछिए-आप स्वयं नीखर हैं या धनगर? यही एक सवाल उनके दावों की सच्चाई सामने लाने के लिए काफी है। यदि वे धनगर हैं तो अपनी पहचान स्पष्ट रूप से स्वीकार करें और यदि वे नीखर गडेरिया, पाल या बघेल हैं तो उसे भी खुले तौर पर बताएं। सच्चाई से बचने के लिए अलग-अलग सामाजिक पहचानों को आपस में मिलाने या भ्रम पैदा करने से न तो इतिहास बदलता है और न ही संवैधानिक तथ्य। अब समय आ गया है कि समाज के सामने बातें भावनाओं, राजनीतिक स्वार्थ और व्यक्तिगत हितों के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों, वास्तविक सामाजिक पहचान और संविधान में निर्धारित अधिकारों के आधार पर रखी जाएं। दुर्भाग्य से, आज यह सवाल भी गंभीरता से उठ रहा है कि धनगर समाज के नाम और धनगर प्रमाणपत्र के मुद्दे पर राजनीति करने वाले कुछ नेता वास्तव में समाज के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई को कितना आगे बढ़ाना चाहते हैं? उनकी भूमिका और उनके कार्यों को लेकर समाज के भीतर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि कोई नेता वर्षों तक धनगर समाज के नाम पर राजनीति करता है, लेकिन जब समाज के वास्तविक संवैधानिक अधिकारों को लागू कराने का समय आता है, तब उसकी भूमिका अस्पष्ट या निष्क्रिय दिखाई देती है, तो समाज को उससे जवाब मांगने और उसकी भूमिका पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। धनगर समाज को अब केवल भाषण, आश्वासन और राजनीतिक नारों की नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति, ठोस कार्रवाई और अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए ईमानदार संघर्ष की आवश्यकता है। दुर्भाग्य से, ऐसा भी प्रतीत होता है कि कुछ राजनीतिक शक्तियां और स्वार्थी तत्व नहीं चाहते कि धनगर समाज अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर मजबूती से आवाज उठाए। समाज को भ्रमित करने, उसकी पहचान को लेकर विवाद खड़ा करने और उसके अधिकारों की लड़ाई को कमजोर करने के प्रयासों पर अब गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। लेकिन अब धनगर समाज जाग चुका है। झूठ, भ्रम और स्वार्थ की राजनीति हमेशा नहीं चल सकती। सच्चाई को दबाया जा सकता है, लेकिन हमेशा के लिए मिटाया नहीं जा सकता। अब समाज को तय करना होगा कि वह किसके भाषणों पर विश्वास करेगा और किसके वास्तविक कार्यों को अपना मापदंड बनाएगा। पहचान स्पष्ट होगी तभी अधिकार स्पष्ट होंगे। सच्चाई स्वीकार होगी, तभी समाज आगे बढ़ेगा और जब धनगर समाज अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट होकर खड़ा होगा, तो कोई भी शक्ति उसकी आवाज को हमेशा के लिए दबा नहीं सकती।
-गम्भीर धनगर, आगरा
मो. 9690470266
पहचान स्पष्ट होगी तभी अधिकार स्पष्ट होंगे!
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