कारखानों से निकला धुआँ,
शहरों का गंदा पानी!
लील रहे ये हवा भूमि जल,
गटक रहे जिंदगानी!!
जंगल को संरक्षण दीजे,
साँसों को ताजगी
धन-सम्पदा सफाया करना,
लाएगी त्रासदी
पर्यावरण की चीखों में है,
हम-सब की मनमानी!
लील रहे ये हवा भूमि जल,
गटक रहे जिंदगानी!!
माटी की उर्वर क्षमता को,
करते नष्ट रसायन
फसलों की गुणवत्ता पर,
विष भरते यही रसायन
दूषित धुआँ से हवा प्रदूषित,
उन्नति की कहानी!
लील रहे ये हवा भूमि जल,
गटक रहे जिंदगानी!!
पक्षी परिंदों से सीखें,
प्राकृतिक व्यवहार
सोना जागना भी निर्धारित,
मर्यादित आहार
गाते-चहकते दिनचर्या से,
जुड़ा हुआ हर प्राणी!
लील रहे ये हवा भूमि जल,
गटक रहे जिंदगानी!!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985
कारखानों से निकला धुआँ!
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