जीवन एक मेला है।
सुख-दुख का झमेला है।
कभी संग साथी तो,
कभी मनुष्य अकेला है।
जीवन है अनजाना सफर।
हम सब हैं यहां मुसाफिर।
कुछ खोना, कुछ पाना है।
राही तुझे चलते ही जाना है।
कभी महकते सुन्दर फूल।
कभी उड़ती भयंकर धूल।
अपना कर्तव्य, पथ मत भूल।
बनाए रख जीवन में उसूल।
जीवन मेले को मधुर बनाओ।
आशाओं के फूल खिलाओ।
मुसीबत में भी मुस्कुराओ।
पढ़-लिखकर आगे बढ़ते जाओ।
-प्रोफेसर (इंजीनियर) भजनलाल हंस बघेल
प्रिंसिपल, जीवीएन पॉलिटेक्निक
कॉलेज, पलवल, हरियाणा
मो. 9588523484
जीवन-मेला…
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