गडरिया समुदाय पंजाब की आधिकारिक विमुक्त जाति की सूची में सम्मानित नहीं है। आमतौर पर गडरिया (पाल, धनगर) समुदाय को पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। विमुक्त जातियों से जुड़ी वास्तविक वैधानिक स्थिति का विवरण इस प्रकार से है-विमुक्त जातियां वे समुदाय हैं जिन्हें ब्रिटिश शासन के दौरान ‘आपराधिक जनजाति अधिनियम’ के तहत अधिसूचित किया गया और जिन्हें आजादी के बाद 31 अगस्त 1952 को स्वतंत्र भारत सरकार द्वारा इस कानून से मुक्त किया गया। इस कानून में गडरिया जाति का नाम नहीं था। गडरिया समुदाय मूल रूप से एक पारंपरिक पशुपालक और चरवाहा समुदाय रहा है और इस ऐतिहासिक सूची में पंजाब क्षेत्र के भीतर उनका नाम शामिल नहीं था। वर्तमान में पंजाब सरकार के आधिकारिक न्याय और अधिकारिता विभाग में रिकॉर्ड के अनुसार पंजाब राज्य में गडरिया समुदाय विमुक्त जाति का हिस्सा नहीं है। 2019 में बरखा राम जो पंजाब के रहने वाले हैं उन्होंने हरियाणा के गडरिया समाज के नासमझ लोगों को गुमराह करके गडरिया जाति को सांसी (जो एक आपराधिक जाति है) की उपजाति बताकर सरकार से घोषित करवा दिया जिस पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी जो अभी तक बरकरार है। यहीं नहीं बरखा राम सरकार को भी गुमराह करके विमुक्त जाति वेलफेयर बोर्ड का चेयरमैन बन गया जोकि विमुक्त जाति के लोगों के अधिकार का हनन है। ज्ञात रहे गडरिया जाति आदि काल से तथा ब्रिटिश काल से भी पूर्व में कभी भी नोटिफाइड कास्ट नहीं रही जिसको आजादी के बाद डिनोटिफाइड किया गया हो। गडरिया समुदाय को अपने मान सम्मान और स्वाभिमान को बचाने के लिए सजग रहने की आवश्यकता है। ना जाने कौन और कब इस समाज के स्वरूप को बिगाड़ने का कुकर्म कर सकता है।
-आर.एस. रौतेला एडवोकेट, फरीदाबाद
मो. 9313428505
पंजाब की गडरिया जाति को गुमराह किया जा रहा है!
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