उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए एक महत्वपूर्ण विषय पर मैं अपने समाज के सभी जागरूक साथियों, विभिन्न संगठनों के अध्यक्षों तथा राजनीतिक दलों के सम्मानित पदाधिकारियों से निवेदन करना चाहता हूँ। उत्तर प्रदेश में माता अहिल्याबाई होलकर के वंशज तथा पाल/गड़ेरिया समाज की जनसंख्या लगभग 10% के आसपास मानी जाती है। कई राजनीतिक दलों ने समाज के नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद देकर सम्मान दिया है, जो निश्चित रूप से सराहनीय कदम है। लेकिन समाज की वास्तविक जनसंख्या और राजनीतिक भागीदारी को देखते हुए यह उतना पर्याप्त नहीं है, जितना होना चाहिए। समाज को उपमुख्यमंत्री, गृहमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। वास्तविकता यह है कि इस स्थिति के पीछे सबसे बड़ा कारण स्वयं हमारा समाज भी है। पाल/गड़ेरिया समाज की जनसंख्या अधिक होने के बावजूद हमारी राजनीतिक एकता और संगठनात्मक शक्ति उतनी मजबूत नहीं बन पाई है जबकि निषाद और राजभर जैसे अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वाले समाजों ने अपनी राजनीतिक ताकत को मजबूत किया है और उसका प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। आज हमारे समाज के कई युवा राजनीति में आगे बढ़ने की इच्छा रखते हैं, लेकिन अलग-अलग दिशा में कार्य करने के कारण उनकी सामूहिक शक्ति बिखर जाती है। इसका प्रभाव केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार जैसे राज्यों में भी देखने को मिल रहा है। इसलिए मैं सभी संगठनों के अध्यक्षों, सामाजिक नेताओं तथा विभिन्न राजनीतिक दलों से विनम्र निवेदन करता हूँ कि 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए ऐसा ठोस और संयुक्त प्रयास किया जाए, जिससे हमारे समाज का कोई योग्य भाई उत्तर प्रदेश में कम से कम उपमुख्यमंत्री या गृहमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुँच सके। यह कोई असंभव या बहुत बड़ी बात नहीं है। जिस दिन समाज के सभी लोग एकजुट होकर अपनी संख्या के अनुरूप विधायक और सांसद चुनकर भेजने लगेंगे, उसी दिन हमारा राजनीतिक सम्मान और भागीदारी स्वत: मजबूत हो जाएगी। सभी की एकता ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है।
-संतोष पाल
राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीजीएम संगठन
मो. 9123259860
सभी की एकता ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है!
1
1
vote
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted