आज भारत में अति पिछड़े समाजों की स्थिति और ज्यादा दयनीय हो गई है क्योंकि शिक्षा, व्यापार, प्रशासनिक सेवाओं में ये समाज पहले से ही पिछड़े थे परन्तु आज बदले राजनीतिक परिदृश्य में इनकी हालत बद से बदतर हो गई है, ऊपर से इन समाजों का युवा वर्ग इतना जागरूक नहीं है। राजनीति में आज भी ये वर्ग दूसरों की कुर्सी और तिरपाल बिछाकर उनके पीछे भाग रहे हैं। रही-सही कसर पाखण्ड ने पूरी कर दी। ब्राह्मणों ने बड़ी चतुराई से इनको कांवर, पत्थर-पूजा जैसे ढोंगों में फंसाकर रखा है ताकि समय और धन बर्बाद होता रहे और बच्चों का उच्च शिक्षा से ध्यान भटकता रहे। राजनीति और पाखण्ड के चक्रव्यूह में फंसे हैं अति पिछड़े समाज जिसमें हमारा गडरिया समाज भी आता है। हमारे गड़रिया समाज के पिछड़ने का कारण भी एक जैसा है। पाखण्ड के चक्रव्यूह में नवयुवकों को फंसाकर रखा है। कांवर उठवाना, भण्डारा कार्य में लगाना जैसे पाखण्ड के खर्चीले कार्य हैं। ऐसे कार्यों में मुख्य भूमिका समाज के ही लालच में फंसे सामाजिक भाइयों की है। थोडेÞ से लालच में धर्म के बहाने समाज की वोटों को मनुवादियों को दिलवाते आए हैं और समाज चुनाव लड़ने से वंचित रह जाता है। आज जरूरत है समाज हित में पाखण्ड और राजनीति के बंधन से बचकर अपने सामाजिक भाइयों को प्रत्यक्ष राजनीति में लाना होगा, वोट देकर सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी, तभी समाज की स्थिति सुधरेगी। राजनीति में पिछलग्गूपन से कुछ का तो भला होता रहेगा परन्तु समाज वहीं का वहीं रहेगा। इसलिए युवा पाखण्ड से बचें और प्रत्यक्ष राजनीति में आगे आएं, तभी जागरूक और शिक्षित समाज बनेगा।
-सतबीर बघेल, जेवर
मो. 8800120437
युवा पाखण्ड से बचें और प्रत्यक्ष राजनीति में आगे आएं!
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