
अहमदाबाद। शहर के नारोल इलाके में स्थित शांति शुक्र सोसाइटी में 29 सितंबर की शाम को एक दुखद घटना घटी। एक नाबालिग छात्र आयुष बघेल की लिफ्ट में फंस जाने के कारण मौत हो गई। इस गंभीर घटना के बाद, निवासियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि लिफ्ट का रखरखाव समय पर नहीं किया जाता है और उन्होंने इस बारे में बिल्डर को कई बार सूचित किया है, लेकिन इसके बावजूद बिल्डर द्वारा कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए गए हैं। फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया है और नाबालिग का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बताया जाता है कि 14 वर्षीय आयुष बघेल स्कूल से घर आ रहा था। आयुष का सिर लिफ्ट की लोहे की सलाखों और दरवाजे के बीच फंस गया था जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही ऐंठन के कारण उसकी मौत हो गई। अंशु के परिवार को सूचना मिलते ही वे भी दौड़ते हुए आए और अपने बेटे को मृत देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। इस घटना से फ्लैट में रहने वाले सभी लोग शोक में डूब गए। सुबह आयुष का पोस्टमार्टम हुआ, लेकिन परिजनों और समाज के लोगों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। इसी बीच जिम्मेदारी तय किए बिना अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने का विरोध किया गया। न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे लोगों में से शेफर्ड रामकेश धनगर को हिरासत में लिया गया और बाद में पुलिस प्रशासन द्वारा आयुष का अंतिम संस्कार करवा दिया गया। लेकिन यह लड़ाई यहीं खत्म नहीं हुई। समाज के वरिष्ठजनों ने आगे बढ़कर शेफर्ड रामकेश धनगर की रिहाई के लिए प्रयास किया और न्याय की आवाज को मजबूती दी। इस पूरे मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष पाल की भूमिका विशेष रूप से प्रशंसनीय रही। उनकी अथक मेहनत, कानूनी प्रयास और दृढ़ता के परिणामस्वरूप आखिरकार बिल्डर के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। किसी बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई करवाना कोई छोटी बात नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि जब समाज अपने अधिकार और न्याय के लिए शांतिपूर्ण, संगठित और दृढ़ता के साथ खड़ा होता है, तो उसकी आवाज को नजरअंदाज करना आसान नहीं होता। -ब्यूरो
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