गुना। 29 अगस्त को पूरे उत्साह से देशभर में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया गया। इस अवसर पर योगाचार्य महेश पाल द्वारा हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि मैदान पर खिलाड़ी दौड़ता है, पसीना बहाता है और जीत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देता है। लेकिन क्या केवल मजबूत शरीर किसी खिलाड़ी को चैंपियन बना सकता है? नहीं। क्योंकि निर्णायक क्षण में शरीर के साथ दिमाग की शांति, सांसों पर नियंत्रण, एकाग्रता और संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यही वह जगह है जहां योग खेल विज्ञान से जुड़ता है और योगासन खिलाड़ी की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। आज के खिलाड़ी के सामने प्रतिस्पर्धा कहीं अधिक कठिन है। तकनीक, फिटनेस, डाइट और स्पोर्ट्स साइंस के साथ मानसिक तैयारी भी खेल प्रदर्शन का अहम हिस्सा बन चुकी है। इसीलिए अब सवाल केवल यह नहीं है कि खिलाड़ी कितना मजबूत है? सवाल यह भी है कि वह दबाव में कितना शांत और संतुलित रह सकता है, योग खिलाड़ी के लिए शरीर से आगे का विज्ञान है, योग को केवल लचीलेपन से जोड़ना इसकी क्षमता को सीमित करना होगा। उपयुक्त योगाभ्यास खिलाड़ी की प्रशिक्षण प्रक्रिया में फ्लेक्सिबिलिटी, मोबिलिटी बैलेंस, बॉडी अवेयरनेस, ब्रीदिंग कंट्रोल, कंसंट्रेशन और रिलैक्सेशन जैसे पहलुओं पर काम करने में सहायक होते हैं। खिलाड़ी के लिए योग के 5 महत्वपूर्ण आयाम निम्नलिखित हैं-
- फ्लेक्सिबिलिटी : शरीर की गति और मोबिलिटी को बेहतर बनाने में सहायता।
- संतुलन : शरीर के संतुलन और नियंत्रण को विकसित करने में उपयोगी।
- एकाग्रता : प्रतियोगिता के दबाव में ध्यान केंद्रित रखने की क्षमता को मजबूत करने में सहायक।
- श्वास पर नियंत्रण : श्वसन के प्रति जागरूकता और नियंत्रित श्वास का अभ्यास।
- रिकवरी और रिलैक्सेशन : प्रशिक्षण के बाद शरीर और मन को रिलैक्स करने में सहायता।
योग किसी खेल का विकल्प नहीं है; यह खिलाड़ी की तैयारी को बेहतर बनाने वाला पूरक माध्यम हो सकता है। अब योग सिर्फ अभ्यास नहीं, प्रतियोगिता भी है। यही बदलाव योगासन स्पोर्ट्स को खास बनाता है। योगासन प्रतियोगिता में खिलाड़ी की स्थिरता, संतुलन, सटीकता, शरीर की अलाइनमेंट, नियंत्रण और प्रस्तुति जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। अर्थात खिलाड़ी केवल आसन नहीं करता वह अपने शरीर और मन पर नियंत्रण का प्रदर्शन करता है। यही कारण है कि योगासन खेल बच्चों और युवाओं के लिए एक ऐसा मंच बन रहा है जहां वे फिटनेस के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक भावना भी विकसित कर सकें। मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में योगाचार्य महेश पाल योग और योगासन को खेल के साथ जोड़ने की दिशा में निरंतर सक्रिय हैं। राष्ट्रीय स्तर पर योगासन निर्णायक एवं तकनीकी गतिविधियों से जुड़े योगाचार्य महेश पाल का विशेष जोर इस बात पर है कि बच्चों और खिलाड़ियों को योगासन के खेल आधारित और वैज्ञानिक स्वरूप से परिचित कराया जाए। उनका मानना है ह्यखिलाड़ी की सफलता केवल उसकी शारीरिक शक्ति पर निर्भर नहीं करती। शरीर का संतुलन, श्वास का नियंत्रण, मन की एकाग्रता और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। योग इन क्षमताओं के विकास में उपयोगी भूमिका निभाता है।ह्ण -ब्यूरो