13
Jun
मामूली इंसान हो तुम!
खुद को खुदा मत समझो,एक मामूली इंसान हो तुम।क्यों इतराते हो इतनाक्या खुदा का पैगाम हो तुम?मौसम ए गर्मी में,तो
09
Jun
पेंशन-ऐ-हसीना…!
जवानी में हमारे भी बड़े रंग थे,'तनख़्वाह' नाम की एक हसीना के संग थे।महीने की पहली तारीख को वो मुस्कुराती
09
Jun
मेरी कलम…!
मेरी कलम चल पड़ती,फिर रुकने का नाम नहीं लेती।।मेरी कलम संघर्ष की कलम,समझौते का नाम ही नहीं लेती।।बड़ी मुसीबत में
07
Jun
देवी अहिल्या की महिमा…!
देवी अहिल्या की बड़ी महिमा गाते हैं हम शान सेदेश-विदेश के सभी सनातनी तर जाएंगे मां के नाम सेकोई कहता
06
Jun
कहाँ मुक्त मन!
(मधुगीति 260605 A) 5:37कहाँ मुक्त मन,हो सका बंधनों से;रहा लिप्त बिन बात,वह हर किसी से!न कोई है उसका,न कोई किसी