19
Jun
मैं मुक्त हूँ, अभिव्यक्त हूँ!
(मधुगीति 260617) 01:58मैं मुक्त हूँ, अभिव्यक्त हूँ,अनुभूत हूँ, अणु भूत हूँ;सापेक्ष सुर, संभूत हूँ,निरपेक्ष सत्ता, स्रोत हूँ!ना लिप्त हूँ, ना
19
Jun
मुझे जीना है!
मेरा मन डूब रहा हैअनजाने अंधकार मेंमेरी सारी कोशिशेंमेरे सारे प्रयासबेकार हो रहे हैं।टूट रहा है बार-बारमनोबल!सांसारिक आघातअपनों का दगाजब
17
Jun
आंगन में दीवार उठाओगे!
बर्तन सम टकराकर,आंगन में दीवार उठाओगे!बाहर एक स्वर में चिल्लाओ,जग में धूम मचाओगे!!अपना हित, नुकसान गैर का,ऐसा जीवन मत जीनानिर्झर
14
Jun
जीवन-मेला…
जीवन एक मेला है।सुख-दुख का झमेला है।कभी संग साथी तो,कभी मनुष्य अकेला है।जीवन है अनजाना सफर।हम सब हैं यहां मुसाफिर।कुछ