01
Apr
मैं कहाँ वो रहा जो था पहले!
(मधुगीति 260327A ) 19:35मैं कहाँ वो रहा जो था पहले,कल कहाँ रहूँगा आज जो हूँ;काल के बदलते प्रवाहों में,देश के
01
Apr
मैं मौन हूं…
मैं मौन हूं बस यही बहुत हैकोई कहे कौन हूं बस इतनाकहूंगा कि मैं मौन हूंन मेरी कमजोरी है न
01
Apr
इंसान परेशान बहुत है!
अच्छी थी, पगडंडी अपनी।सड़कों पर तो, जाम बहुत है।।फुर्र हो गई फुर्सत, अब तो।सबके पास, काम बहुत है।।नहीं जरूरत, बूढ़ों
31
Mar
जब तक सोते रहोगे।
जागें और जगाएं!अपना हक और अधिकार खोते रहोगे।उठो जागो और संघर्ष करो।छीन लो अपना हक और अधिकार।अब तनिक न देर
28
Mar
युद्ध होते रहेंगे पृथ्वी तल!
(मधुगीति 260326)युद्ध होते रहेंगे पृथ्वी तल,लहरें बहती रहेंगी हर पल जल;चिंगारी कितनी जलें अग्नि उर,वायु कितनी बहेंगी शून्य सिहर!फुहारें कितनी