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गोपाल प्रसाद बघेल ‘मधु’ को मिली ‘स्पिरिचुअल मैनेजमेंट, लिटरेचर और होलिस्टिक हेल्थ में ऑनरेरी डॉक्टरेट’ की उपाधि

टोरंटो (कनाडा)। 13 मार्च को इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर क्वालिटी एश्योरेंस इन प्री टर्शियरी एंड हायर एजुकेशन (क्यूएएचई) ने अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ बिजनेस एंड सोशल साइंसेज (एयूबीएसएस) के साथ मिलकर गोपाल प्रसाद बघेल ‘मधु’ को आध्यात्मिक नेतृत्व, वैश्विक साहित्य, समग्र स्वास्थ्य (होलिस्टिक वेलबीइंग), सांस्कृतिक उन्नयन और सामाजिक सेवा में उनके असाधारण आजीवन योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘डॉक्टर ऑफ स्पिरिचुअल मैनेजमेंट, लिटरेचर और होलिस्टिक हेल्थ (ऑनोरिस कॉसा)’ से सम्मानित किया। रामपुर, मथुरा (भारत) में जन्मे और वर्तमान में टोरोंटो, कनाडा में रहने वाले गोपाल बघेल ‘मधु’ ने पांच दशकों से ज्यादा समय तक एक असाधारण बहु-विषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) विरासत बनाई है। उनका एकीकृत जीवनवृत्त (इंटीग्रेटेड प्रोफाइल) इंजीनियरिंग विशेषज्ञता, आध्यात्मिक गहराई, साहित्यिक महारत, सांस्कृतिक नेतृत्व और वैश्विक मानवीय जुड़ाव के एक दुर्लभ संयोजन को दर्शाता है। हिंदी, ब्रज, संस्कृत, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, उर्दू और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में लिखी गई 12,000 से ज्यादा कविताओं और लेखों के साथ वे दुनियाभर के हिंदी साहित्य समुदाय में आज के सबसे ज्यादा लिखने वाले साहित्यकारों में से एक हैं। उनकी आध्यात्मिक यात्रा 1968 में ‘आनंद मार्ग’ में दीक्षा के साथ शुरू हुई, जिसके बाद उन्होंने कई दशकों तक योग, तंत्र, ध्यान, राजाधिराज योग और आध्यात्मिक प्रबंधन (स्पिरिचुअल मैनेजमेंट) में पूरी लगन से अध्ययन, अभ्यास व क्रियान्वयन किया और दुनियाभर में इसका प्रचार-प्रसार भी किया। उन्होंने कई विश्वविद्यालयों और इंटरनेशनल फोरम में मार्गदर्शक, आयोजक, संचालक, बीज वक्ता व मुख्य अतिथि के रूप में अपना योगदान दिया, वक्तव्य दिए और आध्यात्मिक दर्शन, योग विज्ञान, समग्र स्वास्थ्य (होलिस्टिक लिविंग) और मानवीय मूल्यों पर अपने विचार सबसे साझा किए। उनकी अध्यक्षता, नेतृत्व व निदेशन में अखिल विश्व हिंदी समिति (टोरोंटो), आध्यात्मिक प्रबंध पीठ (स्पिरिचुअल मैनेजमेंट फाउंडेशन), मधु प्रकाशन और गोपाल होलिस्टिक्स सम्मिलित हैं। व्यावसायिक व प्रबंधन में गोपाल बघेल ‘मधु’ ने भारत की पेपर इंडस्ट्री, ग्लोबल ट्रेड और कनाडा में कम्युनिटी लीडरशिप में अहम योगदान दिया है। उनके प्रमुख अनुभव में सीनियर मैनेजमेंट रोल, एंटरप्रेन्योरशिप और टोरंटो पियर्सन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सर्विस आदि शामिल हैं। उनका सांस्कृतिक असर कवि सम्मेलनों, साहित्यिक उत्सवों और टोरोंटो में भारतीय महावाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट जनरल आॅफ इंडिया) के साथ सहयोग व साझेदारी के जरिए पूरे विश्व व महाद्वीपों में फैला हुआ है। उन्हें 100 से ज्यादा नेशनल और इंटरनेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है, जिसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, विश्व हिंदी संस्थान, हिंदी साहित्य संगम और भारत, कनाडा, अमरीका और यूरोप के कई साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्थानों से मिले सम्मान शामिल हैं। उनके सम्मान साहित्य, अध्यात्म, सामाजिक विकास और वैश्विक सांस्कृतिक समरसता पर उनके गहरे असर को दिखाते हैं। क्यूएएचई और एयूबीएसएस मिलकर आध्यात्मिक ज्ञान को आगे बढ़ाने, वैश्विक साहित्य को बेहतर बनाने, होलिस्टिक हेल्थ प्रैक्टिस को बढ़ावा देने और शिक्षा, संस्कृति और सेवा के द्वारा विश्व समाज को ऊपर उठाने के लिए उनके जिदंगी भर के समर्पण व प्रतिबद्धता को पहचानते हुए यह सम्मान दिया है। हरिकमल दर्पण परिवार की ओर से उन्हें बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ। -सम्पादक

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