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सामाजिक सेवा ही कर्म और धर्म है नारायण प्रसाद पाली का

तखतपुर। छत्तीसगढ़ के ग्राम तखतपुर जिला बिलासपुर में 1 अप्रैल को श्रीमती फेकनबाई व श्री विशाल प्रसाद पाली के घर में जन्म लेने वाला बालक जो अपने सेवा कार्यों से अपनी राष्ट्रीय स्तर तक अलग पहचान बनाने में सफल रहा। ऐसे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी, बड़े भैया नारायण प्रसाद पाली को जन्मदिन 1 अप्रैल, सेवा दिवस के अवसर पर अभिनंदन स्वरूप यह लेख राष्ट्र के प्रबुद्ध वर्ग के बीच प्रस्तुत है ताकि रचनात्मक सेवा कार्यों के माध्यम से ऐसे कार्यों में लगे हुए भाई-बहनों को प्रोत्साहन मिल सके, प्रेरणा मिल सके। नारायण प्रसाद पाली के माता-पिता ने अत्यंत गरीब होने के बाद भी उन्हें शिक्षा-दीक्षा दिलाने में कोई कमी नहीं की। नारायण प्रसाद पाली ने हिंदी साहित्य एवं राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट तक पढ़ाई की और पंचायत विभाग मध्य प्रदेश शासन में लिपिक के पद पर कार्य करते हुए लेखपाल के पद से सेवानिवृत हुए। पिता के प्रोत्साहन और प्रेरणा से अपने स्कूल समय से ही लेखन व कविता पाठ में भागीदारी निभाने लगे और उसमें जल्द ही पारंगत हो गए। वर्ष 1980 को अखंड ज्योति संस्थान मथुरा में पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य से दीक्षा उपरांत सेवा कार्यों में जुटे रहे जो आज तक निरंतर जारी है। वे रचनात्मक कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सेवा कार्यों को ही महायज्ञ मानकर अपने श्रम, समय की आहुतियां समर्पित करने लगे और सेवा को ही कर्म तथा अपना धर्म बना लिया। इसी के माध्यम से गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहे। उनके द्वारा साहित्य सृजन, कविता पाठ, पौधारोपण, पौधा संरक्षण, समसामयिक विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों में लेखन, पुस्तक समीक्षा, गौ सेवा, गौ संरक्षण के लिए आंदोलन, गर्मियों के दिन में शुद्ध पेयजल सेवा, समाज में व्याप्त कुरीतियों के उन्मूलन के लिए लगातार सुझाव के रूप में सामाजिक पदाधिकारियों की बैठकों में विचार प्रस्तुत करना, हरिकमल दर्पण सामाजिक पत्रिका के माध्यम से ग्राम से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक प्रबुद्ध लोगों के बीच में विचारों का संप्रेषण करना, प्रस्तुतीकरण करना प्रारंभ किया जो विगत कई वर्षों से निरंतर जारी है। गडरिया समाज छत्तीसगढ़ के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक जैसे राज्यों के स्वजातीय पदाधिकारी, साहित्यकार, इतिहासकार एवं प्रबुद्ध लोगों के साथ-साथ अन्य समाज के प्रबुद्ध लोगों के साथ वैचारिक संबंध बनाने और विचारों के आदान-प्रदान करने की सेवा भी उन्होंने निरंतर जारी रखी। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को अपनी आराध्य मानकर उन्हें केंद्र में रखकर सभी कार्यों को करना उन्होंने प्रारंभ किया है और सर्व प्रगतिशील समाज के भाई-बहनों को कार्यक्रमों में आमंत्रण करने की नई परंपरा की शुरूआत की है ताकि गडरिया, पाल, बघेल समाज के साथ अन्य प्रगतिशील समाज के भाई-बहनों तक भी लोकमाता के जीवन दर्शन का प्रचार-प्रसार हो सके, लोगों को जानकारी हो सके। अपने प्रेरणास्रोत के रूप में पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य व माता भगवती देवी शर्मा शांतिकुंज हरिद्वार के संरक्षण और प्रेरणा से निरंतर समर्पित होकर मानव समाज के जन जागरण में जुटे हुए हैं। नारायण प्रसाद पाली गडरिया पाल समाज के स्वयंसेवक सैनिक की तरह बिना किसी पद प्रतिष्ठा के, बिना किसी दिखावे के, सेवा भाव से समाज के उत्थान के लिए लगे हुए हैं। स्थानीय हो या राष्ट्रीय स्तर पर समाज के किसी भी भाई-बहन के विरुद्ध कोई शासन-प्रशासन द्वारा कार्यवाही होती है तो छत्तीसगढ़ से सबसे पहले आवाज उठाने और विरोध करने वाले साहसी व्यक्ति हैं जो प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को भी पत्राचार करने में परहेज नहीं करते। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन परिचय को छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में पढ़ाए जाने की मांग वे कई वर्षों से करते रहे, जो अब कक्षा छठवीं में लागू कर दिया गया है। इसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जयंती के अवसर पर अवकाश हेतु मांग की जा रही है। हरिकमल दर्पण के प्रधान संपादक निरंजन सिंह पाल के संपर्क में आने के बाद उनके लेख और कविताएं राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित होने लगीं और प्रांतीय प्रतिनिधि छत्तीसगढ़ होने के कारण विभिन्न राज्यों के भाई-बहनों से, प्रबुद्ध लोगों से राष्ट्रीय स्तर पर संपर्क बढ़ा। उन्हें मेरठ में हरिकमल दर्पण के स्थापना दिवस पर सम्मानित भी किया गया। उन्हें रचनात्मक सेवा कार्यों के लिए मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा दो बार तथा एक बार छत्तीसगढ़ के राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया। इसी तरह अनेक सामाजिक संगठन, साहित्य संगठन, धार्मिक आध्यात्मिक संगठनों के द्वारा भी उन्हें सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जा चुका है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न केंद्रीय एवं जिला जेल में कैदी सुधार कार्यक्रम हेतु समय-समय पर पहुंचकर कैदियों को अपराध व नशे से मुक्त जीवन हेतु अपने सहयोगी साथियों के साथ प्रेरित कर रहे हैं। अब तक केंद्रीय कारागार रायपुर, बिलासपुर, जिला कारागार कबीरधाम, मुंगेली, जांजगीर, धमतरी में वे अपनी सेवाएं दे चुके हैं। प्रशंसा और निंदा से परे होकर, निरंतर अपने सेवा कार्यों को गति देने के लिए वे समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। अब तक उनकी पांच कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्य सृजन के क्षेत्र में भी वे निरंतर कार्य कर रहे हैं। निश्चित रूप से हमारे गडरिया समाज के साथ-साथ अन्य समाज के बड़ी संख्या में भाई-बहन उनसे जुड़े हुए हैं और सेवा कार्यों में सहयोगी बने हुए हैं। उनके सेवा कार्यों के माध्यम से ही आने वाले समय में अनेक लोगों को प्रेरणा मिलेगी। इसी मंगल कामना के साथ जन्मदिन के पावन अवसर पर नारायण प्रसाद पाली को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं। -निरंजन लाल धनकर

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