आज हम अपने आप को जैसा सोच लें हमारा शरीर वैसा ही कार्य करने लगता है। हमारे शरीर के अंग जैसे-हाथ, आंखें, दिमाग, जिव्हा, शरीर का हाव-भाव उसी प्रकार से कार्य करने लगता है। उदाहरण के लिए-हम जिम में गए कसरत करने के लिए, वहां पर हमने कसरत की। हाथ, पैर, कमर, सीना आदि सभी अंगों की वर्जिश करने के बाद हमारे शरीर में जो स्फूर्ति, उमंग पैदा हुई वह हमारे शरीर से होते हुए दिमाग तक गई। दिमाग ने स्फूर्ति महसूस की, हमको ऐसा लग रहा है जैसे कि हमारा शरीर बलिष्ठ बन गया हो, हम योद्धा बन गए हैं। यही स्फूर्ति हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में हमारे दिमाग को संकेत देती है। आप इस कार्य को करो, मैं आपको अच्छी सी अनुभूति प्रदान करूंगा। यह कार्य निरंतर करने से हम एक दिन बलिष्ठ बन ही जाते हैं। यह तो पॉजिटिव एनर्जी थी, हमारे दिमाग में पॉजिटिव थॉट आई, पॉजिटिव कार्य किया, हम पॉजिटिव हो गए, हमारा पूरा शरीर पॉजिटिव हो गया। दूसरा थॉट है हमारे दिमाग में नेगेटिव पॉइंट। उदाहरण के लिए-मैं अगर अपने घर से बाहर गया तो गाड़ी चलानी पड़ेगी, चाय, नाश्ता, पानी करना पड़ेगा और रास्ते में कहीं दोस्त मिल गए या परिचित व्यक्ति मिल गए तो कुछ पैसा खत्म भी करना पड़ेगा और समय भी बर्बाद होगा। यही सोच लेकर नेगेटिव पॉइंट हमारे दिमाग में आ जाते हैं। हम लोग वहां पर जाने से पहले नेगेटिव पॉइंट दिमाग में ले आए तो हम अपने किसी कार्य को सिद्ध नहीं कर सकते। घर से निकलना पड़ेगा, लोगों से मेल-मिलाप करना पड़ेगा। अगर हम घर में ही कूप मंडूक की तरह बैठे रहे तो हमारा विकास रुक जाएगा। विकास चाहते हो तो एनर्जी पॉजिटिव प्वाइंट लेकर आओ, जो होगा वह सही होगा। हमारी योजना, हमारा कार्यक्षेत्र हमको पता है। हमने उसका समय से पहले पूरी तरह से परीक्षण कर लिया है। ऊर्जा हमें कहां लगानी है, किस जगह पर लगानी है, ऊर्जा सही जगह पर लगाओगे तो प्लस पॉइंट आएंगे। अगर ऊर्जा का गलत दिशा में प्रयोग करोगे तो माइनस पॉइंट आएंगे। हम जो भी कार्य करना चाहते हैं, जिस जगह पर कार्य करना चाहते हैं, जिस क्षेत्र में कार्य करना चाहते हैं, अमुक व्यक्ति के साथ कार्य करना चाहते हैं, हमने इन सभी के बारे में पहले सोच लिया है, समझ लिया है, परीक्षण कर लिया है कि यह व्यक्ति हमारे साथ काम सही कर सकता है या नहीं कर सकता या उस व्यक्ति के साथ हम काम को सही समय पर कर सकते हैं। हम योजनाबद्ध काम को चालू करें तो राजनीति में भी हम लोग अपना परचम लहरा सकते हैं। इसलिए कार्य करने से पहले रुको, सोचो, समझो, तब आगे बढ़ो और सफलता को प्राप्त करो।
-हरिओम सिंह बघेल
महेश्वरा, ग्वालियर, मध्यप्रदेश
मो. 9977554274
कार्य करने से पहले रुको, सोचो, समझो, तब आगे बढ़ो!
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