मैं मौन हूं बस यही बहुत है
कोई कहे कौन हूं बस इतना
कहूंगा कि मैं मौन हूं
न मेरी कमजोरी है न लाचारी
न इच्छा है न अपेक्षा है
न ही उपेक्षा की चिंता है
बस मेरी राह मेरी मंजिल
खामोशियों से चलती है
न मुझे खरगोश बनकर दौड़ लगानी है
बस कछुआ चाल ही सही मेरे लिए
बस आवाज दूर तक जानी है
मेरी सादगी उनके चकाचौंध से आगे है
इसलिए खामोशियों में ही
आवाज उठानी है
न मंच चाहिए न माला मुझको
बस मेरी आवाज दूर तक जानी चाहिए
किसी को मनी चाहिए ओ उसे मुबारक
मुझे तो रंगमंच में काबिलियत चाहिए
मैं काबिल हूं यह मेरी मूर्खता है
ओ काबिल है यह उसकी बुद्धिमत्ता है
मैं खामोश हूं यही क्या कम है
कोई दूर है तो क्या गम है।
-महेंद्र प्रसाद पाल ‘माही गुरुजी’
मो. 8960194670
मैं मौन हूं…
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