(1)
जीवन में भर लो उमंग
आशा और उम्मीद की उठती रहें तरंग
मन-मंदिर में खुशियों के दीप जलें।
सुंदर सुगंधित मधुकर फूल गुलशन में खिलें।
पूर्णिमा का मधुर चांद गगन में धीरे-धीरे चले।
उचित समय आने पर तरुवर फूले- फले।
(2)
सुख-दु:ख हैं जीवन की धूप-छांव।
आगे बढ़, मजबूती से रख जीवन की डगर पर पांव।
संघर्ष करने के बाद ही जीवन में, सफलता का सुख मिले।
पतझड़ के बाद ही ऋतुराज बसंत में, जीवन-पथ में नए फूल खिले।
(3)
प्रात:काल शीतल समीर मंद पवन का झोंका।
पूर्व में उगता सूरज, दिन-प्रतिदिन देता उज्ज्वल सुनहरे जीवन का मौका।
घोर अंधेरी रात हो या भयंकर
आंधी-तूफान हो जीवन में भले!
सत्य-पथ पर, कर्म-पथ पर, जीवन में सदैव आशा का दीपक जले!!
(4)
घर, परिवार, कुटुंब, समाज देश और दुनिया सारी।
आशा-उम्मीद, उमंग-तरंग का तराना
सुनाती बुलबुल और कोयल प्यारी।
संकल्प शक्ति, उच्च-विचार,
प्रेम-सद्भाव से जीवन फूले-फले!
लो आई दिवाली! जीवन-पथ पर,
कर्तव्य-पथ पर, जीवन में खुशियों के दीप जले!!
1.‘आज पूरा विश्व एक ग्लोबल मंच में तब्दील हो गया है जहां दुनिया के अलग-अलग रंग एक साथ देखने को मिलते हैं।’
- ‘अपनी प्रतिभा का उपयोग ने करना स्वयं के प्रति अन्याय है।’
- ‘चरित्र का उत्कर्ष मनुष्य जीवन को आशाओं से रंग देता है।’
-घनिष्ठ हंस, पलवल
मो. 9599737902