बुरा वक्त भी बताता है
कि कौन कहां जाता है।।
साथ कौन है साथी बनकर
कौन हाथ आगे बढ़ाता है।।
कुछ-कुछ कदम चलें होंगे
कुछ रास्ते से लौटे होंगे
पर जिसने ठान ली मंजिल पे
चलने की ओ आगे मिले होंगे।।
रास्ता कंकड़ का पत्थर का
यह परवाह न की होगी उसने
जिसने हौसलों से परखें होंगे।।
इसलिए खामोश बनकर चलना होगा
कदम से कदम मिलाकर बढ़ना होगा।।
छोड़ इसकी चिंता सफर के राही।
कुछ रिश्तों को छोड़कर बढ़ना होगा।।
कुछ सच कहना होगा
तो कुछ सच सुनना होगा।।
मंजिल मिलना या न मिलना
फिर भी आगे बढ़ाना होगा।।
-महेंद्र प्रसाद पाल ‘माही गुरुजी’
मो. 8960194670
आगे बढ़ना होगा!
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