रामराज्य की ढपली खूब बजाई
ढपली की आड़ में रावणता फैलाई
खाकी हुई बेशर्म
सिक्कों में सितारे बेच रही
लुच्चे और लफंगों संग कर रही खोटे कर्म
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ
बस एक कोरा जुमला है
हकीकत में सारे गिद्ध मिलकर नोच खाओ
कानून बनाये दिखाने को
कानून की धज्जियां उड़ाते हैं नेता
घड़ियाली आंसू बहाते बेवकूफ बनाने को
ऊपर से नीचे तक सब रंगे हुए हैं
चोर-कोतवाल सब मिले हुए हैं
कलयुगी रामराज्य में रावणों के चेहरे खिले हुए हैं।
-मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
गॉव-रिहावली, डाक-तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा-283111
मो. 9627912535
कलयुगी रामराज्य!
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