गर्मी में झुलसते हैं, सर्दी में ठिठुरते हैं।
बारिश में भीगते हैं, अथक परिश्रम करते हैं।।
ले आरजू काम की, रोज घर से निकलते हैं।
नसीब अच्छा तो काम मिलता, नहीं तो बेरंग घर लौटते हैं।।
जब बेरंग लौटते हैं, घर में चूल्हे न जलते हैं।
सुकूं ये रात का खोते, मासूम भूखे बिलखते हैं।।
तड़पते देख अपनों को, ये बस घुटते रहते हैं।
पर अपनों की उम्मीद की खातिर, मुस्कुराकर सब दर्द सहते हैं।।
हर चौराहे पे मिलते हैं, सबके ताने सुनते हैं।
ये बहादुर होते हैं, कभी आस न खोते हैं।।
संघर्ष जीवनभर करते हैं, बड़े खुद्दार होते हैं।
इन योद्धाओं को हम सब मजदूर कहते हैं।।
प्रस्तुति : श्याम शंकर पाल उर्फ सचिन
हरिकमल दर्पण हरियाणा प्रभारी
पाल एकता मंच राष्ट्रीय सचिव
मो. 9891441417, 9999007349
मजदूर…
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