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अहिल्याबाई होल्कर के मंदिरों को सेवा केंद्र बनाने का संकल्प लें!

300 वर्ष बाद लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुशासन व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण, उद्योग, व्यापार, कला संस्कृति, शास्त्र और शस्त्र जैसे विषयों पर आज राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा की जा रही है और उनकी महिमा का बखान किया जा रहा है। हमारे गडरिया समाज के लिए यह बड़े गौरव की बात है। समाज के भाई-बहनों व सामाजिक संगठनों के प्रयास से और राजनीतिक सहयोग से देश-विदेश में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं, मंदिर बनाए जा रहे हैं। यह बड़ा ही अच्छा कार्य है। प्रतिमा की स्थापना से उन महान विभूतियों को याद किया जाता है जो आज हमारे बीच नहीं हैं। प्रतिमा स्थापना तो अच्छी बात है, मंदिर का बनाया जाना भी अच्छी बात है। इससे भी अच्छी बात यह है कि हम लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के मंदिरों को सेवा का केंद्र बनाएं, जन जागरण का केंद्र बनाएं। मंदिरों की देख-रेख व्यवस्था सही हाथों में रहे, इसके लिए मंदिरों को विधिसम्मत पंजीकृत कराएं। ट्रस्ट बनाएं और उसमें अधिकारी नहीं, स्वयंसेवक बनकर कार्यों को आगे बढ़ाओ, तभी मंदिर स्थापना का प्रतिफल सभी समाज के भाई-बहनों को मिलेगा और प्रतिमाओं का सम्मान भी होगा। अनेक राज्यों में अनेक स्थानों पर महान पुरुषों व नारियों की प्रतिमाएं तो स्थापित कर दी जाती हैं किंतु बाद में उनकी देख-रेख के अभाव में अथवा सरकारी अनुमति के अभाव में ऐसी प्रतिमाओं को नगर पालिकाओं या नगर निगम द्वारा विकास के नाम पर तोड़ दिया जाता है। इससे आस्था को ठेस पहुंचती है और शासन-प्रशासन के बीच अनावश्यक रूप से गतिरोध पैदा हो जाता है, बवाल भी हो जाता है जिससे लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही हो जाती है और फिर बाद में वह अदालतों के चक्कर काटते रहते हैं। इस संबंध में हमारा सुझाव है कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर का मंदिर सही भूमि पर बनाया जाए जिससे प्रतिमा को कभी कोई नुकसान न पहुंच सके। मंदिर को ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत कराया जाए और समाज के सेवाभावी लोगों को उसमें शामिल किया जाए ताकि मंदिर की देखरेख व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रहे। प्रतिमाओं की स्थापना का उद्देश्य भली-भांति प्रत्येक पदाधिकारी और समाज के भाई-बहनों को मालूम होना चाहिए कि किस उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रतिमा की स्थापना की जा रही है अथवा की गई है। इस महत्व को केंद्रित करते हुए ट्रस्ट का संचालन किया जाए। जहां के सामाजिक भाई-बहन समर्थ हैं, बड़ी जनसंख्या है, आर्थिक, राजनीतिक व सामाजिक दृष्टि से समर्थ हैं, वहां पर लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के सेवा कार्य जैसे शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालय, महाविद्यालय व विश्वविद्यालय का संचालन किया जाए। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के नाम पर चिकित्सालय, पर्यावरण सुधार के लिए उद्यान, बाग-बगीचे, वाटिका का निर्माण मंदिरों के माध्यम से संचालित किया जाए। समाज के युवक-युवतियों के प्रशिक्षण के लिए समय-समय पर कार्यक्रम का आयोजन कर उन्हें सामाजिक रीति-नीति, परंपरा एवं लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन चरित्र का परिचय कराने का प्रयास किया जाए। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की स्मृति में उद्योग, व्यापार, कुटीर उद्योग, लघु उद्योग जैसे विषयों पर समाज के युवा भाई-बहनों को प्रेरित किया जाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए मंदिरों या ट्रस्ट के माध्यम से प्रयास किया जाना चाहिए। यदि हम लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा स्थापित करते हैं और उनकी विचारधारा को जनता तक पहुंचाने का काम करते हैं तभी प्रतिमा स्थापना का उपक्रम पूर्ण होगा। यदि प्रतिमा स्थापना करने के बाद उसे हम भूल जाते हैं, प्रतिमा धूल में पड़ी रहती है, मंदिरों में जुआरी-शराबी लोगों का कब्जा हो जाता है तो जरा सोचिए कि लोगों पर उसकी क्या प्रतिक्रिया होगी। इसलिए हमारा विनम्रतापूर्वक राष्ट्र के गडरिया समाज के समस्त पदाधिकारियों से निवेदन है कि वे इन विषयों पर गंभीरतापूर्वक विचार करें और प्रतिमा स्थापना के साथ-साथ लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के विचारों व उनके सेवाकार्यों का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें ताकि उनके नाम के आगे लिखा लोकमाता सार्थक हो सके, उनका सम्मान युगों-युगों तक कायम रह सके। अपने हक और अधिकारों के लिए हम संघर्ष कर सकें, मजबूत बन सकें। यही निवेदन, प्रार्थना, सुझाव जयंती के अवसर पर सादर प्रस्तुत हैं।
-नारायण प्रसाद पाली
वरिष्ठ नागरिक, साहित्यकार छत्तीसगढ़
मो. 9575761235

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